धूल में मिले कांग्रेसी आपस में लड़ते पंजाब-कश्मीर में
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) हालिया लोकसभा तथ दूसरे चुनावों में हार जाने के बावजूद कांग्रेसी सुधरने का नाम नहीं ले रहैं। पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर कांग्रेस में कलह ही कलह है।
कश्मीर के बड़े कांग्रेसी नेता अब्दुल गनी वकील ने पार्टी को छोड़ने की घोषणा कर दी। वे गुलाम नबी आजाद के करीबी माने जाते थे। उन्होंने कहा कि पार्टी में लोकतंत्र नाम की कई चीज नहीं है।
सोनिया-राहुल निशाने पर
वकील ने सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी पर भी वार किया। माना जा रहा है कि राज्य कांग्रेस से कुछ और नेता अन्य दलों में जा सकते हैं। उधर, पड़ोसी राज्य पंजाब में भी कांग्रेस के नेता आपस में लडने से बाज नहीं आ रहे। हाल के धूरी विधानसभा उप चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने कांग्रेस को हराया।
संसद में बहस हो या हंगामा, पूछिए कांग्रेस से
शिरोमणि अकाली दल के प्रत्याशी गोविंद सिंह लोंगोवाल ने कांग्रेस-सांझा मोर्चा के संयुक्त प्रत्याशी समर प्रताप सिंह को हराया। लोगोंवाल पूर्व मंत्री हैं और तीन बार विधायक रह चुके हैं जबकि समर प्रताप सिंह राजनीति में नए हैं।
दरअसल पंजाब में कांग्रेस अमरिंदर सिंह और प्रताप सिंह बाजवा के बीच बंटी है, इसलिए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं रहा। एक दौर में कांग्रेस बहुत मजबूत थी पंजाब में।
थके कांग्रेसी
लंबे समय से कांग्रेस को कवर करते रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सौरभ ने कहा कि कांग्रेसी सत्ता से बाहर होते ही अनुशासनहीन हो जाते हैं। अब उनमें लड़ने की ताकत नहीं रही।













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