उत्तराखंड में रंग ला रहा सरकार का भागीरथी प्रयास, नमामि गंगे परियोजना का दिख रहा असर
गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, ये संस्कृतियों और संस्कारों का अभय पुंज भी है। गंगा नदी के किनारों पर सभ्यताओं ने जन्म लिया है। यूं ही नहीं सनातन संस्कृति में गंगा नदी को, देवी का जीवंत स्वरूप माना है। आस्थावान लोग इन्हें गंगा मां कहकर पुकारते हैं।
हिमालय के धवल शिखरों से प्रचंड वेग से बहती मां गंगा, ऋषिकेष और हरिद्वार तक आते-आते कलरव करती शांत जलधारा बन जाती हैं। यहीं पर देश के कोने-कोने आए श्रद्धालु मां गंगा की गोद में अपने समस्त विकारों का त्याग कर, मानवीय मुल्यों का संकल्प लेते हैं।

वर्ष 2023 में हरिद्वार में हर की पौड़ी से 4 करोड़ से अधिक कांवड़ियों से जल भरा था। वहीं, कांवड़ यात्रा के अलावा पूरे साल में अलग-अलग समय पर यहां 1.5 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे।
मां गंगा की स्वच्छता और उन्हें पावन बनाए रखने की आवश्यकता महसूस की गई। इसके लिए भागीरथी प्रयासों की आवश्यक्ता थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने गंगा नदी में प्रदूषण को रोकने और नदी को मूलस्वरूप में पुनर्जीवित करने के उद्देश्यों के साथ उत्तराखंड में भी नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत की।
उत्तराखंड में नमामि गंगे परियोजना के तहत, हरिद्वार के जगजीतपुर में प्रतिदिन 68 मिलियन लीटर की क्षमता वाला जल प्रशोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। इसके साथ ही 27 मिलियन लीटर की क्षमता वाले मलजल प्रशोधन संयंत्र को प्रोन्नत किया गया है। इसके अतिरिक्त, कोटद्वार में खोह नदी में गिरने वाले नौ नालों की टैपिंग के साथ-साथ और एक मलजल प्रशोधन संयंत्र का निर्माण भी किया गया है।
वहीं हरिद्वार के सराय में 18 मिलियन लीटर क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, चोरपानी में 5 मिलियन लीटर क्षमता वाला जल प्रशोधन संयंत्र , बद्रीनाथ में 1 मिलियन लीटर और 0.01 मिलियन लीटर क्षमता वाले दो जल प्रशोधन संयंत्र के साथ-साथ ऋषिकेश के चंदेश्वरनगर में मलजल प्रशोधन संयंत्र, लक्कड़घाट में 26 मिलियन लीटर क्षमता और मुनि की रेती में 7.5 मिलियन लीटर क्षमता वाले जल प्रशोधन संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
उत्तराखंड में नमामि गंगे परियोजना के संचालित होने से गंगा नदी की स्वच्छता बढ़ी है। इसे यहां आने वाले श्रद्धालु भी महसूस कर रहे हैं। केंद्र सरकार के प्रयासों से गंगा नदी की निर्मलता बनी हुई है। इसका सुखद परिणाम ये हुआ कि चार धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
2021 में कोरोना काल का प्रभाव रहने के बावजूद चारधाम की यात्रा पर 5.18 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं 2022 में 46.27 लाख श्रद्धालुओं ने चार धाम की यात्रा की थी। ये आंकड़ा साल 2023 में बढ़कर रिकॉर्ड 55 लाख के भी पार पहुंच गया था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि नमामि गंगे परियोजना के सार्थक परिणामस्वरूप उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिला है।












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