'IIT और IIM का इस्तेमाल देश और हिंदू विरोध के लिये किया जाता था'
नई दिल्ली। एफटीआईआई के चेयरमैन पद के लिए गजेंद्र सिंह का विरोध करने वाले हिंदू विरोधी है। आरएसएस की पत्रिका आर्गेनाइजर का यह विवाद अभी थमा भी नहीं था कि आरएसएस की एक और इकाई ने आईआईटी हिंदू और राष्ट्र विरोधी करार दे दिया है।

आरएएसस की पत्रिका ने आरोप लगाया है कि आईआईएम के विरोध के पीछ राजनीतिक साजिश थी और राजनीति के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था। साथ ही यह भी आरोप लगाया है कि कांग्रेस और लेफ्ट ने देश के प्रीमियम संस्थानों पर अपनी विचारधारा चलाते हैं और इनके डॉयरेक्टर्स का इस्तेमाल राज्यपाल के माध्यम से किया जाता रहै है।
पत्रिका ने आईआईटी बांबे के चेयरमैन अनिल काकोदकर, आईआईएम अहमदाबाद के चेयरमैम एएम नाइक के कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना करने पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया है।
पत्रिका ने दावा किया कि आईआईटी रुड़की जोकि हरिद्वार जैसे पवित्र शहर में है वहां मांसाहारी खाना दिया जाने लगा साथ ही एनआईटी में भी यही परंपरा शुरु हुई। राउरकेला में कम्युनिटी हॉल में पूजा करने पर रोक लगा दी गयी और यह सब यूपीए के कार्यकाल में हुआ। इससे यह साबित होता है कि इन संस्थाओं का जोकि जनता के टैक्स के पैसे से चलता है उसका राजनीतिक इस्तेमाल किया जाता रहा। इन संस्थानों को देश विरोधी और हिंदू विरोधी संस्थान बना दिया गया है।
लेख में यह तक लिखा गया है कि इन संस्थानों में कम नैतिक रुप से शिक्षित प्रोफेसर्स ने लोगों ने छात्रों को भ्रमित किया। इन शिक्षकों को भी इन गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।












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