IAF Personnel killings Case: यासीन मलिक के खिलाफ पेशी वारंट जारी, 22 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
एक विशेष आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधि (TADA) अदालत ने बुधवार को यासीन मलिक के खिलाफ भारतीय वायुसेना कर्मियों की हत्या के मामले में प्रोडक्शन यानि कि पेशी वारंट जारी किया है। आपको बता दें कि यासीन मलिक जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) नामक एक प्रतिबंधित गुट का प्रमुख है। उस पर 1990 में कश्मीर में भारतीय वायु सेना (IAF) के चार कर्मियों की हत्या में शामिल होने का आरोप है।

आदेश के बारे में जानकारी देते हुए सीबीआई के वकील मोनिका कोहली ने बताया कि टाडा अदालत ने आज यासीन मलिक के लिए एक प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। मामले में अब अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी। वकील मोनिका कोहली ने बताया कि सुनवाई अब 22 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई है।
उम्र कैद की सजा काट रहा है यासिन मालिक
यासिन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। इस वक्त वह तिहाड़ जेल में बंद और उम्रकैद की सजा काट रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उसे दो बार दो मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
1990 में की थी हत्या
25 जनवरी 1990 को जेकेएलएफ के आतंकवादियों ने स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना सहित भारतीय वायुसेना के चार जवानों की हत्या कर दी थी। मामले में सीबीआई ने मलिक के खिलाफ 31 अगस्त, 1990 को जम्मू में टाडा अदालत के समक्ष आरोप पत्र दायर किया था। स्क्वाड्रन लीडर खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना अपने दिवंगत पति को न्याय दिलाने के लिए केस लड़ रही है।
मलिक पर चल रहा है मुख्यमंत्री मुफ्ती की बेटी का अपहरण का केस
एयरफोर्स के जवानों की हत्या के अलावा मलिक पर 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और महबूबा मुफ्ती की बहन रुबिया सईद के अपहरण का मामला भी चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1989 में मलिक ने घर लौटते वक्त रूबिया का अपहरण कर लिया गया था। इसके बदले यासीन के संगठन ने पांच आतंकियों को छोड़ने की मांग रखी। जिसके बाद सरकार ने मांग को मांगते हुए पांचों आरोपियों को छोड़ दिया था।
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