20 साल से गायब था शख्स, अदालत कर चुकी थी 'मृत' घोषित, साधु के वेश में ऐसे पकड़ा गया लाखों की ठगी करने वाला ठग
Hyderabad: एक आदमी किसी से पैसे उधार लेता है, फिर गायब हो जाता है, लोग उसे मरा हुआ समझ बैठते हैं और फिर वो आदमी दो दशक बाद जिंदा मिलता है। ये सुनने में काफी फिल्मी है पर ऐसा सच में हुआ है। ये कहानी शुरू होती है आज से करीब 22 साल पहले। जब सीबीआई ने 1 मई 2002 को वी चलपति राव के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
उस समय, वह हैदराबाद में एसबीआई की चंदूलाल बारादरी शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर था। उसने कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकानों से फर्जी कोटेशन और अपने परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम पर फर्जी वेतन प्रमाण पत्र का उपयोग करके ऋण प्राप्त करके बैंक से 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की थी।

दो दशक पहले, एक अदालत ने उसे "मृत" घोषित कर दिया था, जब वो बैंक धोखाधड़ी के बाद 50 लाख रुपये लेकर गायब हो गया था। रविवार को सीबीआई अधिकारियों ने उसे तमिलनाडु में गिरफ्तार किया, जहां वो एक साधु के वेश में रह रहा था। यह गिरफ्तारी एक बड़े और समन्वित मिशन के बाद हुई है।
देशभर में अलग-अलग पहचान के साथ घूमता रहा शख्स
पिछले कुछ सालों में राव ने पकड़े जाने के डर से कई पहचानें अपनाईं। 2004 में गायब होने के बाद, उसकी पत्नी ने 10 जुलाई को कमाटीपुरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि उसके पति लापता हैं। 2011 में, उसने सिविल कोर्ट में याचिका दायर की कि उसके पति को मृत घोषित कर दिया जाए क्योंकि वो सात साल से लापता थे। कोर्ट ने वी चलपति राव को मृत घोषित करने का आदेश जारी किया।
दिसंबर 2004 में सीबीआई ने इस मामले में दो आरोपपत्र दाखिल किए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद राव लापता हो गया। सीबीआई की जानकारी के अनुसार, राव तमिलनाडु के सलेम भाग गया और 2007 में एम विनीत कुमार नाम से दूसरी महिला से शादी कर ली। उसने इस नई पहचान के साथ आधार नंबर भी हासिल कर लिया।
राव की गतिविधियों पर सीबीआई की नजर
सीबीआई ने पाया कि राव अपनी दूसरी पत्नी के जरिए अपनी पहली शादी से हुए बेटे के संपर्क में था। 2014 में, उसने बिना किसी को बताए सलेम छोड़ दिया और भोपाल चला गया, जहां उसने लोन रिकवरी एजेंट के तौर पर काम किया। बाद में, वह उत्तराखंड के रुद्रपुर में चला गया और वहां एक स्कूल में काम करने लगा।
जब सीबीआई की टीम 2016 में रुद्रपुर पहुंची तो उन्हें पता चला कि राव पहले ही भाग चुका है। एम विनीत कुमार नाम से ईमेल आईडी और आधार विवरण का उपयोग करते हुए, सीबीआई ने गूगल के कानून प्रवर्तन विभाग से संपर्क किया। इन विवरणों से पता चला कि राव औरंगाबाद के वेरुल गांव में एक आश्रम में गया था।
साधु का वेश और धोखाधड़ी
आश्रम में उसने स्वामी विधितात्मानंद तीर्थ नाम अपनाया और दूसरा आधार कार्ड बनवाया। हालांकि, दिसंबर 2021 तक उसने आश्रम के प्रबंधकों से 70 लाख रुपये की ठगी करने के बाद आश्रम छोड़ दिया। इसके बाद राव राजस्थान के भरतपुर चला गया और 8 जुलाई 2024 तक वहीं रहा।
इसके बाद वह अपने एक शिष्य के साथ रहने के लिए तिरुनेलवेली चला गया। सीबीआई को विश्वसनीय जानकारी मिली कि राव समुद्र के रास्ते श्रीलंका भागने की योजना बना रहा है। आखिरकार, अधिकारियों ने उसे खोज निकाला और रविवार को तिरुनेलवेली के नरसिंगनल्लूर गांव से उसे गिरफ्तार कर लिया।
यह गिरफ्तारी भारत भर में कई पहचानों और स्थानों से जुड़ी एक लंबी तलाश का अंत है। यह जटिल जांच इस बात को साबित करती है कि दृढ़ प्रयासों से आखिरकार 'भगोड़ों' को न्याय के कटघरे में लाया जा सकता है।












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