भारत में नोटबंदी से पीएम मोदी की सिंगापुर में हो रही जय-जय

सिंगापुर की मीडिया ने की नोट बैन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ। पश्चिम के कई मीडिया कर चुके हैं पीएम मोदी की नोटबंदी पर तारीफ।

नई दिल्‍ली। सिंगापुर की मीडिया ने 500 और 1,000 रुपए का नोट बंद करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। मीडिया ने इसे भ्रष्‍टाचार खत्‍म करने के लिए पीएम मोदी की एक सराहनीय पहल करार दिया है।

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क्‍या लिखा सिंगापुर की मीडिया ने

आठ नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 500 और 1,000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर करने का ऐलान किया, तो दुनिया का ध्‍यान इस तरफ गया।

सिंगापुर से पब्लिश होने वाले न्‍यूजपेपर द इंडिपेंडेंट ने लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नाटकीय ऐलान के तहत देश से भ्रष्‍टाचार और गैर-कानूनी पैसे के भंडार को खत्‍म करने के लिए 500 और 1,000 के नोट को बंद करने का ऐलान कर दिया है।

इस न्‍यूजपेपर ने एक भारतीय अधिकारी के हवाले से लिखा कि भारत में अब सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली क्‍यूआन यू का जन्‍म हो चुका है।

न्‍यूजपेपर के मुताबिक सिंगापुर में मौजूद भारतीय अधिकारियों के दिलों में पीएम मोदी के लिए सम्‍मान बहुत हद तक बढ़ गया है।

आधुनिक सिंगापुर के जन्‍मदाता ली

सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री रहे ली क्‍यूआन यू को आज के आधुनिक सिंगापुर का जन्‍मदाता माना जाता है।

यू ने सिंगापुर को टापू की जगह एक विकसित देश बनाने के लिए काफी मेहनत की। ली ने देश से भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने का प्रण लिया और। प्रयासों का ही नतीजा था कि सिंगापुर भ्रष्‍टाचार खत्‍म करने की कोशिशों में लगे देशों के लिए एक आदर्श बन गया।

ली जून 1950 में सिंगापुर के प्रधानमंत्री चुने गए थे और वह 28 नवंबर 1990 तक सिंगापुर के प्रधानमंत्री रहे।

इस दौरोन ली ने देश से भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने की दिशा में कई सराहनीय पहल की थीं। वर्ष 1959 में ली की पार्टी पीपुल्‍स एक्‍शन पार्टी (पीएपी) को बहुमत मिला और सिंगापुर को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली।

इसके बाद ली ने सिंगापुर से भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने के लिए पुरस्‍कार और सजा देने वाली सोच के तहत काम करना शुरू किया।

बतानी पड़ा कहां से कमाई दौलत

ली का मानना कि एक भ्रष्‍ट सरकार और जनता कभी साथ आ नहीं सकते हैं। ली हमेशा अपने ऑफिस में और अपनी सरकार के मंत्रियों को सिर्फ सफेद कपड़े पहनने के लिए कहते थे।

वर्ष 1960 में ली देश में प्रिवेंशन ऑफ करप्‍शन एक्‍ट (पीएसी) लेकर आए। इस कानून के बाद सिंगापुर के हर अमीर व्‍यक्ति पर कमाई हुई दौलत का सुबूत देने का दबाव पड़ा।

इसके अलावा सिंगापुर से बाहर किसी देश में भी अगर किसी नागरिक ने भ्रष्‍ट तरीके से पैसा जमा करके रखा होता तो उसे भी देश के कानून के तहत ही सजा दी जाती।

पुलिस ऑफिसर से लेकर नेता तक नपे

सिंगापुर में एक करप्‍ट प्रैक्टिस इनवेस्टिगेशन ब्‍यूरों यानी सीपीआईबी भी है। इसके तहत किसी भी व्‍यक्ति की जांच करने का अधिकार मिला हुआ है चाहे वह पुलिस ऑफिसर हो या फिर कोई नेता।

इस ब्‍यूरों का मुखिया सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है। आज सिंगापुर में बदलाव के पीछे इस कानून का योगदान सबसे बड़ा माना जाता है।

मोदी खुद भी यू के फैन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सिंगापुर के पूर्व राष्‍ट्रपति ली क्‍यूआन यू के बड़े फैन हैं। मार्च 2015 में जब प्रधानमंत्री यू का निधन हो गया तो पीएम मोदी के शोक संदेश से इस बात की जानकारी मिली। पीएम मोदी ने यू को 'नेताओं के बीच में एक शेर' करार दिया था।

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