जानिए मिनटों में सुरेश प्रभु ट्रेन में कैसे भिजवा देते हैं दूध और डायपर

नयी दिल्ली (ब्यूरो)। 25 फरवरी को रेल मंत्री सुरेश प्रभू रेल बजट पेश करेंगे। इस बजट का पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा है। किसी को अच्छी कोच वाली ट्रेनों की उम्मीद है तो किसी को किराए में कमी किए जाने की। कोई माल किराया पर ध्यान बनाए हुए है तो कोई रेलवे की सफाई पर कदम उठाने की उम्मीद लगाए बैठा है।

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जानिए 5 मिनट में युरेश प्रभु ट्रेन में कैसे भिजवा देते हैं दूध और डायपर

जानिए 5 मिनट में युरेश प्रभु ट्रेन में कैसे भिजवा देते हैं दूध और डायपर

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इन सबसे अलग कुछ लोगों से ये भी पूछते हुए सुना गया है कि ट्वीटर पर समस्या लिखने के तुरंत बाद कैसे उसका समाधान हो जाता है। लोग जानना चाहते हैं कि सुरेश प्रभु का ट्वीटर सेल कैसे काम करता है। जो आईए आज आपको इसी विषय के बारे में विस्तार से बताते हैं।

सीर्फ तीन लोग हैंडल करते हैं पूरी टीम

  • अनंत स्वरूप (एक्जक्यूटिव डायरेक्टर)। अनंत स्वरूप 1992 बैच के आईआरपीएस ऑफिसर हैं। पूरे कंट्रोल रूम को मॉनिटर करते रहना अनंत स्वरूप की ही जिम्मेदारी है।
  • हासिन यादव (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी): हासिन यादव मैकेनिकल इंजीनियर हैं। इन्हें 2003 में बतौर मैकेनिकल इंजीनियर रेलवे ने नियुक्त किया था। नौकरी में रहते हुए यादव ने आईआईएम से एमबीए किया और फिर ऑस्ट्रेलिया जाकर एक फर्म के साथ काम किया।
  • वेद प्रकाश (डायरेक्टर, इंफार्मेशन एंड पब्लीसिटी): वेद प्रकाश 1998 बैच के इंडियरन रेलवे ट्रैफिक ऑफिसर हैं। वेद प्रकाया को सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज करने का लंबा अनुभव है। वेद प्रकाश रेलवे सोशल मीडिया सेल की प्रमुख भी हैं।

कैसे काम करता है सुरेश प्रभु का ट्वीटर सेल

रेल मंत्रालय की चौथी मंजिल पर कमरा नंबर 454। जी हां यही भारतीय रेलवे का ट्वीटर कंट्रोल रूम है। यहां 8 घंटे की शिफ्ट में रेल कर्मचारी काम करते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस कंट्रोल रूम का एक नियम है। नियम यह कि कोई भी कंप्यूटर एक पल के लिए भी ऑफ नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि ना जाने किस यात्री की शिकायत कब आ जाए।

यह इस टीम की जिम्मेदारी होती है कि ट्वीटर पर शिकायत आने के पांच मिनट में उसकी शिकायत दूर की जाए। यह प्रकिया राउंड द क्लॉक चलती रहती है जिसके चलते ही देर रात को भी आने वाली शिकायत फौरन दूर की जाती है।

DG रेलवे खुद करते हैं सुपरवाइज

ट्वीटर कंट्रोल रूम को डीजी रेलवे खुद सुपरवाइज करते हैं। डिवीजन स्तर पर डीआरएम ने अपने एक अधिकारी को ट्विटर सेल से अटैच कर दिया है। जो लगातार ट्विटर पर नजर रखता है।

Whatsapp ग्रुप पर भेजा दिया जाता है मैसेज

रेलवे के एक आला अधिकारी ने बताया कि जैसे ही हमारे पास कोई शिकायत आती है हम उसे अपने व्हाट्सअप ग्रुप में डाल देते हैं। इससे समय की काफी बचत होती है। संबंधित अधिकारी तुरंत एक्शन लेता है। कई बार ऐसा भी होता है कि कंट्रोल रूम से सीधे हमारे पास फोन आ जाता है।

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