मोदी के नोटबंदी के फैसले से कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी हुई बंद
500 और 1,000 रुपए के नोट के बाद कश्मीर में छाई अशांति। अलगाववादी नेताओं के पास पैसे न होने की वजह से अब पत्थरबाजी के लिए नहीं मिल रहे कैडर्स।
श्रीनगर। आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से ही पूरी कश्मीर घाटी सुलग रही थी। लेकिन आठ नवंबर के बाद से ही घाटी में एक अजीब सी शांति महसूस की जा सकती है। वजह है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 500 और 1,000 के नोटों को बैन करने का ऐलान।

पत्थर फेंकने के लिए पैसे कहां से दें
जी हां, इस ऐलान ने भले ही देश के बाकी हिस्सो में मौजूद नागरिकों को हलकान कर रखा है वहीं घाटी के लिए मानों यह ऐलान एक वरदान बन गया।
एक बार पत्थरबाजी के लिए युवाओं को 500 रुपए की कीमत देने वाले अलगाववादी नेता अब परेशान है कि युवाओं को भड़काने के लिए अब पैसे कहां से लाएं जाएंगे।
मोदी सरकार के 500 और 1,000 रुपए के नोटों को चलने से बाहर करने के फैसले ने कश्मीर में हवाला की रकम के जरिए जारी विरोध प्रदर्शनों पर लगाम लगा दी है।
गृह मंत्रालय के पास शुक्रवार को एक रिपोर्ट भेजी गई है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने एक इंग्लिश न्यूजपेपर को जानकारी दी कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को अब कुछ समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने अपनी चिंताओं के बारे में अपने कैडर्स को बता दिया है।
अलगाववादी नेता ऐलान से हैरान
इस अधिकारी ने बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस की ओर से सरकार को बताया गया है कि सरकार के इस कदम से अलगाववादी नेता भौचक्के हैं।
इसका नतीजा है कि अब चार माह से जारी प्रदर्शन को पीछे धकेल दिया है। अलगाववादी नेता सिर्फ हवाला के जरिए पैसे हासिल करते हैं और इस पर काफी हद तक असर पड़ा है।
इन अलगाववादी नेताओं को बांग्लादेश, नेपाल और दुबई से विरोध प्रदर्शनों के लिए पैसा आ रहा था। अब पैसे आने के सारे स्त्रोत सूख चूके हैं।
वहीं इंटेलीजेंस ब्यूरों (आईबी) के अधिकारियों का कहना है अब कम से कम विरोध प्रदर्शन को फिर से चालू करने के लिए चार से पांच माह का समय इन नेताओं को चाहिए होगा।
अलगाववादी नेता अब फिर से काले धन को हासिल करने और उसके नए जरिए के बारे में योजना बनाने में लग गए हैं।
हवाला लेन-देन में 80% की गिरावट
आईबी अधिकारियों के मुताबिक हवाला के जरिए होने वाले लेन-देन में चार दिनों में 80 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।
आईबी अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई में मौजूद हवाला ऑपरेटर्स अंडरग्राउंड हो गए हैं और केंद्र के निर्णय ने उनकी गर्दन पर फंदा डाल दिया है।
कश्मीर घाटी में मौजूद अलगाववादियों का अब खाड़ी देशों से पैसे को लेकर संपर्क खत्म कर दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर के हवाला ऑपरेटर्स को अब सुरक्षाबलों की ओर से बड़े ऑपरेशन का डर सता रहा है। ऑपरेटर्स ऐसे में अब जाली नोटों को स्वीकार करने का खतरा मोल नहीं लेना चाहते हैं।
सूत्रों की मानें तो इंटेलीजेंस एजेंसियां 500 और 1000 के नोट को बैन करने के असर पर आने वाले कुछ माह तक नजर रखने वाली हैं।












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