भाजपा कैसे करती है राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव? कार्यकाल कितना होता है, क्या कहता है पार्टी का संविधान
BJP National President Election: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की कवायद तेज कर दी है। भाजपा का शीर्ष नेतृव पार्टी के नए अध्क्षक्ष के चुनाव की प्रिकिया पर तेजी से आगे बढ़ चुका है।उम्मीद है कि इसी अप्रैल महीने के अंत में या मई माह में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी।
आइए जानते हैं आखिर भाजपा अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कैसे करती है, उसका कार्यकाल कितना होता है और भाजपा अध्यक्ष की ताकत क्या होती है? क्या कहता है भाजपा का संविधान?

बता दें भाजपा के संविधान के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जब तक चुनाव नहीं करवाया जा सकता जब तक 19 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव न हो जाए। अभी तक 14 राज्यों के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुने जा चुके हैं और गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा समेत अन्य कुछ राज्यों के लिए भाजपा के लिए अध्यक्ष को लेकर भी प्रकिया शुरू हो चुकी है। उम्मीद है कि शेष बचे हुए इन राज्यों में जल्द अध्यक्ष का नाम निर्धारित हो जाएगा। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा।
कैसे चुना जाता है भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष?
भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों से मिलकर बने एक चुनावी कालेज के जरिए होता है। औपचारिक प्रक्रिया के बावजूद, चयन काफी हद तक वरिष्ठ पार्टी नेताओं के बीच आम सहमति पर आधारित होता है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का समर्थन अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण है। सभी राज्यों में भाजपा का संगठात्मक चुनाव संपन्न हुए बिना राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सकता।
भाजपा अध्यक्ष की योग्यता और कितना होता है कार्यकाल?
भाजपा अध्यक्ष पद के लिए पात्र होने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 15 वर्षों तक पार्टी का सक्रिय सदस्य होना आवश्यक है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्षों तक सीमित है, और कोई भी व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल से अधिक बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर नहीं रह सकता है।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारियां क्या होती हैं?
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। यह पद पार्टी की भविष्य की दिशा और रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण होता है।भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारियों में पार्टी के लिए रणनीतियां बनाना, चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन और संगठन के भीतर एकता बनाए रखना शामिल है।
भाजपा अध्यक्ष के पास क्या होती है शक्तियां?
भाजपा के संविधान की धारा 20 के तहत अध्यक्ष के पास 120 सदस्यों की एक राष्ट्रीय कार्यकारिणी को इकट्ठा करने का अधिकार है, जो विशिष्ट कोटे के अनुसार महिलाओं, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। यह कार्यकारिणी अध्यक्ष के मार्गदर्शन में पार्टी के पूर्ण सत्र की देखरेख करती है। अध्यक्ष के पास संगठन के महासचिव के सहयोग से क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर संगठनात्मक मंत्रियों को नियुक्त करने का विवेक भी है।












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