मुंबई हमले में कैसे बचा था मोशे?
साल 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले में अपने माता-पिता को खोने वाले मोशे हॉल्ज़बर्ग उस घटना के बाद पहली बार मुंबई आए हैं.
मोशे तब दो साल के थे जब मुंबई में चरमपंथी हमले हुए थे. घटना के 9 साल बाद मोशे के भारत आने की चर्चा खूब है.
हमले में मोशे के माता-पिता की मौत कैसे हुई और मोशे कैसे बचा? ये सवाल बहुत से लोगों के ज़ेहन में है.
26 नवंबर 2008 को रात में करीब पौने 9 बजे चार चरमपंथियों ने नरीमन हाउस पर हमला बोला.
उन्होंने कई इसराइली नागरिकों को बंधक बना लिया था. जिनमें से कुछ की हत्या कर दी थी. उनमें मोशे के माता-पिता भी थे.
हमले में मुंबई स्थित चबाड हाउस में मोशे के पिता गैवरिएल हॉल्ज़बर्ग और मां रिवका को उसके सामने ही गोली मारी गई थी.
माता-पिता की खून से सनी लाशों के बीच दो साल का मोशे रोता रहा.
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मोशे को कंबल में लपेट कर भागी
जब हमलावरों ने गोली चलाई तब मोशे की देखभाल करने वाली आया सैंड्रा सैमुएल चबाड हाउस के निचले हिस्से में थीं.
लगातार गोलियां चलने की आवाज़ आती रही और ऊपर क्या हो रहा है इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था.
जब गोलियों की आवाज़ थमी तो सैंड्रा ने मोशे के रोने की आवाज़ सुनी.
किसी तरह छुपते हुए सैंड्रा उस कमरे में पहुंची जहां गैवरिएल और रिवका की हत्या की गई. तब तक हमलावर सीढ़ियों से ऊपर जा चुके थे.
सैंड्रा ने देखा कि अपने माता-पिता की लाशों के बीच मोशे खून से नहाया पड़ा है और रो रहा है.
सैंड्रा ने चुपचाप मोशे को उठाया और कंबल में लपेटकर वहां से भागने में कामयाब रही.
मूल रूप से गोवा की रहने वाली सैंड्रा लंबे समय से गैवरिएल और रिवका के यहां काम करती थी. गैवरिएल यहूदी धार्मिक नेता के तौर पर भी काम कर रहे थे.
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2010 में सैंड्रा को मिली नागरिकता
माता-पिता की मौत के बाद मोशे को उसके नानी-नानी के हवाले किया गया तो सैंड्रा भी साथ गई.
सैंड्रा को पहले इसराइल का वीजा मिला और फिर 2010 में उन्हें वहां की नागरिकता मिल गई.
सैंड्रा ने मोशे के वयस्क होने तक उसकी देखभाल का फ़ैसला लिया है.
मोशे के नाना रब्बी रॉशनबर्ग ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि मोशे अभी छोटा बच्चा है.
जब वो 20-22 साल का हो जाएगा तब वो उसे वापस मुंबई जाकर अपने माता-पिता की तरह अच्छा काम करने को कहेंगे.
रिवका के पिता ने उनके अंतिम संस्कार के समय बताया था कि वो पांच महीने से गर्भवती थीं. मोशे अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं.
उसके पहले गैवरिएल हॉल्ज़बर्ग और रिवका के दो बच्चे हुए लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वो ज़्यादा दिन जीवित नहीं रहे.
गैवरिएल और रिवका का अंतिम संस्कार यरूशलम में 2 दिसंबर 2008 को हुआ.
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