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मुजफ्फनगर दंगा: बहन से बदतमीजी को भाई कैसे बर्दाश्‍त कर सकता है

 Muzaffarnagar Riots: How can a brother tolerate misbehaviour towards his sister
मुजफ्फरनगर। 'कोई भाई अपनी बहन के साथ होने वाले बुरे बर्ताव पर चुप कैसे रह सकता है?' जी हां ये एक वाक्‍य मौजूदा समय में उत्‍तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना हुआ है। मुजफ्फरनगर दंगे की आग में अब ये मुद्दा घी का काम कर रहा है। दंगों के चार महीने बाद राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक 24 पेज की एक मैगजीन वितरित कर रहा है। इस मैगजीन का नाम है 'मुजफ्फरनगर दंगा'। आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि मुजफ्फरनगर दंगा उस वक्‍त भड़का था जब गौरव और सचिन नाम के दो युवकों की हत्‍या कर दी गई थी।

इन युवकों ने कथित रूप से उस मुस्लिम युवक को मार डाला था जो उनकी बहन को प्रताडित कर रहा था। इस दंगे में 60 लोग मारे गये थे और हजारों लोग बेघर हो गये थे। मैगजीन में लिखे संपादकीय में कहा गया है कि कोई भाई अपनी बहन के साथ होने वाले बुरे बर्ताव पर चुप कैसे रह सकता है? इस संपादकीय पर किसी के हस्‍ताक्षर नहीं है। मैगजीन में दोनों युवकों के फोटो भी दिये गये हैं। सम्पादकीय में सपा की सरकार की मुस्लिमों के प्रति कथित तुष्टिकरण की नीति की आलोचना करते हुए कहा गया है कि सपा सरकार को यह लगता है कि अगर मुस्लिम नाराज हो गए तो उनकी सत्ता चली जाएगी।

इसी वजह से अखिलेश सरकार ने मुस्लिम पीडिजों को पांच-पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। मैगजीन में किसी का नाम नहीं दिया गया था। इसमें पब्लिशर्स का पता दिया गया है जो है, विश्व संवाद केन्द्र-105 आर्य नगर,सूरज कुंड रोड,मेरठ। यह पता मेरठ में संघ की यूनिट का है। संघ के प्रचारक शिव प्रकाश का कहना है कि दंगों से जुड़े तथ्यों के बारे में समाज को जागरूक करने के लिए मेरठ प्रांत के संघ के कार्यकर्ताओं ने पत्रिका प्रकाशित की है।

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