मुस्लिम देशों तक ने किया पाकिस्तान को अनदेखा, पढ़िए किस देश ने क्या कहा?
नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म हुए पांच दिन हो गए हैं और पाकिस्तान को उम्मीद है कि कहीं तो कोई होगा जो इस मसले पर उसे सपोर्ट करेगा। पहले ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान को इस हफ्ते भारत ने आर्टिकल 370 और 35ए खत्म करके बड़ा झटका दिया। पांच अगस्त को सरकार ने जम्मू कश्मीर को मिला विशेष दर्जा खत्म कर दिया। इसके अलावा जम्मू कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया है। शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ स्पष्ट संदेश पाकिस्तान को दे दिया गया है कि उसे इस फैसले को मानना पड़ेगा और दूसरे देशों के आतंरिक मसलों में हस्तक्षेप करना बंद करना होगा।

अमेरिका बोला आतंरिक मसला
फैसला लेने के साथ ही भारत ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) के पी 5 देशों, अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन को फैसले के बारे में जानकारी दे दी थी। फैसले पर अमेरिका की तरफ से बयान पांच अगस्त को आ गया था। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका हर पल जम्मू और कश्मीर में होने वाले घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। विदेश विभाग की ओर से इस बात की तरफ भी मीडिया का ध्यान दिलाया कि जम्मू कश्मीर को भारत अपना एक आतंरिक मसला करार देता है।

चीन ने भी नहीं सुनी फरियाद
बड़ी उम्मीद के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी जिगरी दोस्त चीन के दरवाजे पर आर्टिकल 370 और कश्मीर पर मदद मांगने बीजिंग पहुंचे थे। मगर ऐसा लगता है कि चीन ने भी पाकिस्तान की न सुनने का मन बना लिया है। शुक्रवार को चीन ने कुरैशी को साफ-साफ कह दिया है कि वह भारत और पाकिस्तान को एक ' पड़ोसी' के तौर पर देखता है। चीन की ओर से आए बयान के बाद कुरैशी ने ट्वीट करके कहा था कि चीन ने पाकिस्तान को मसले पर समर्थन दिया है। जबकि चीन की ओर से कहा गया है कि कश्मीर मसले का हल यूएन रेजोल्यूशन और शिमला समझौते के तहत होना चाहिए।

रूस ने कहा संवैधानिक फैसला
रूस की तरफ से भी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया शनिवार को आ गई है। रूस ने भारत के फैसले को संवैधानिक बताते हुए इसका समर्थन किया है। रूस के विदेश मंत्रालय की ओर से प्रतिक्रिया दी गई है। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया,' हम इस बात तथ्य को मानते हैं कि जम्मू और कश्मीर की स्थिति में जो भी बदलाव किया गया है और इसे दो संघ शासित प्रदेशों में बांट दिया गया है, इस पूरी प्रक्रिया को भारत ने संविधान के तहत ही पूरा किया है।' बयान में आगे कहा गया है कि रूस, भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों के सामान्य होने का समर्थक रहा है।

मलेशिया और टर्की खामोश
पाक विदेश विभाग की ओर से भारत के फैसले को गैर-कानूनी बताया गया। साथ ही दावा किया गया कि मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद के साथ इमरान खान ने फोन पर बात की है। मलेशिया की तरफ से पाक को इस मामले पर मदद की पेशकश गई है, ऐसी जानकारी विदेश विभाग ने दी। मलेशिया के अलावा टर्की की तरफ से मदद का ऑफर देने की बात पाक ने कही है। लेकिन अभी तक दोनों ही देशों की तरफ से इस पूरे मामले पर चुप्पी साधी रखी गई है। टर्की तो हमेशा से ही पाकिस्तान को कश्मीर मसले पर अपना समर्थन देता आया है और साथ ही आजादी की बात भी करता है।

इस्लामिक देशों की तरफ से सधी प्रतिक्रिया
पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अपनी बात रखने के लिए ओआईसी यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सदस्य देशों के साथ मीटिंग भी की। इसके बाद ट्विटर पर उन्होंने समर्थन का दावा कर डाला। जबकि हकीकत यह है कि ओआईसी दो देशों यूएई और मालदीव्स ने इस पूरे मसले को आतंरिक मसला बताकर भारत को समर्थन दे दिया है। बहरीन के सुल्तान की तरफ से भी मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया है। यूरोपियन यूनियन की तरफ से जारी बयान में भी कश्मीर मसले को द्विपक्षीय मसला बताते हुए इसे वार्ता के जरिए सुलझाने की सलाह दी गई। यूएन भी शिमला समझौते का जिक्र किया और कश्मीर को पहली बार द्विपक्षीय मसला माना।












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