गड़करी ने बताया, कैसे रात भर जागकर गोवा में जुटाया समर्थन
नतीजें आते ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मुझे फोन किया और उनके घर पर मिलने को कहा। आधे घंटे बाद मैं उनके घर पहुंच गया। इस वक्त शाम के सात बज रहे थे।
नई दिल्ली। गोवा में दूसरे नंबर की पार्टी होते हुए भी सरकार बनाकर भाजपा ने कांग्रेस को पूरी तरह से चित कर दिया है। खास बात ये है कि सूबे में 17 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ा दल है लेकिन पार्टी बहुमत की संख्या 21 तक पहुंचने के लिए 4 विधायक नहीं जुटा पाई जबकि भाजपा ने 13 सीटें जीतीं लेकिन निर्दलीय और दूसरे दलों का समर्थन ले सरकार बना ली। आखिर कैसे बनी थी रणनीति और कौन-कौन थे इसमें शामिल? इसका जवाब केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने दिया है।

नितिन गड़करी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जैसे ही गोवा के रुझान आए हमें पता चल गया कि हमें उस तरह से समर्थन नहीं मिला है जैसे उम्मीद थी। गड़करी ने कहा, ''नतीजें आते ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मुझे फोन किया और उनके घर पर मिलने को कहा। आधे घंटे बाद मैं उनके घर पहुंच गया। इस वक्त शाम के सात बज रहे थे। हमने गोवा को लेकर बात की। उन्होंने मुझसे तुरंत ही गोवा के लिए निकलने को कहा और जाकर स्थिति बनाने को कहा। इसके बाद मैं घर लौटा और एक घंटे के भीतर गोवा के लिए निकल गया।"
पूरी रात जागते रहे गड़करी
नितिन गड़करी ने बताया, ''उसी रात मैं गोवा के गैर-कांग्रेसी नेताओं से मिला और उनका समर्थन जुटाने की कोशिश की लेकिन दूसरे दलों ने पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनाए जाने की सूरत में ही समर्थन देने की बात कहकर मुझे मुश्किल में डाल दिया। पर्रिकर कैसे रक्षा मंत्रालय छोड़ कर आएंगे, ये बात मुझे परेशान कर रही थी। रातभर बैठकों के बाद मैंने सुबह 5 बजे अमित शाह को फोन किया और स्थिति बताते हुए कहा कि मैं कोई फैसला नहीं कर पा रहा हूं आप बताएं क्योंकि दूसरे दल पर्रिकर के नाम पर ही राजी हैं।''
गड़करी ने बताया कि 8:30 बजे अमित शाह ने प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं से बात की फिर भाजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला किया गया कि अगर पर्रिकर के जाने से राज्य में पार्टी की सरकार बनती है और इसके लिए पर्रिकर राजी हो जाते हैं तो फिर सरकार जरूर बनाई जानी चाहिए। इसके बाद पर्रिकर से पार्टी ने बात की तो वो गोवा जाने को राजी हो गए और रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देकर गोवा रवाना हो गए। पर्रिकर ने गोवा के सीएम पद की शपथ लीं और बुधवार को 22 विधायकों के समर्थन से सदन में बहुमत साबित किया।












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