होमी भाभा का बंगला 372 करोड़ रुपए में नीलाम

भारत रत्न विजेता प्रोफेसर सीएनआर राव समेत कई वैज्ञानिक नीलामी का विरोध कर रहे थे।यह विरोध इसलिए था कि यह बंगला किसी निजी हाथ में नहीं जाना चाहिए लेकिन विरोध का कोई असर नहीं हुआ। सीएनआर राव ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर यहां तक कहा था कि 'कृपया कर इस बंगले का बिकने से बचा लें।' मोदी ने किसी भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया और अंतत: बंगला बिक गया। बंगला खरीदने वाले व्यक्ति का नाम अभी गोपनीय रखा गया है।
कई वैज्ञानिकों और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के दो कर्मचारियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में नीलामी रोकने के लिए याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने नीलामी रोकने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी। हालांकि कोर्ट यह कह चुका है कि अगर सुनवाई से पहले बंगला नीलाम भी हो जाता है, तो जरूरत महसूस होने पर उसे रद्द किया जा सकता है।
मां-बाप के सम्मान में रखा था घर का नाम मेहरांगीर:
भाभा ने एक हजार स्क्वायर मीटर में बने चार मंजिला मकान का नाम मेहरांगीर रखा था। उन्होंने यह नाम अपनी मां मेहर बाई और पिता जहांगीर के सम्मान मे रखा था। भाभा के भाई जमशेद भाभा ने वह मकान अपनी वसीयत में नेशनल सेंटर फॉर द परफार्मिग आर्ट को दे दिया था।
नेशनल सेंटर फॉर द परफार्मिग आर्ट ने 7 मार्च को अखबार में सूचना दी कि इस मकान की नीलामी होने वाली है, जिसका रिजर्व प्राइस 257 करोड़ है। परमाणु ऊर्जा विभाग के एक लाख कर्मचारियों वाले यूनियन और स्टाफ एसोसिएशन ने एक औपचारिक प्रस्ताव पास करके कहा कि वे अपने वेतन से उस मकान को खरीदेंगे। परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस नीलामी को रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी डाली हुई है।












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