अमित शाह ने किया आपराधिक कानून में बड़े बदलाव का इशारा, कहा- अब थर्ड डिग्री टॉर्चर के दिन खत्म
अहमदाबाद, जुलाई 13: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संकेत दिया है कि केंद्र सरकार जल्द ही आपराधिक कानूनों में बदलाव कर सकती हैं। शाह ने यह बात सोमवार को गांधीनगर में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च एंड एनालिसिस ऑफ नारकोटिक ड्रग्स एंड सायकोट्रोपिक सब्सटान्सेस के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान अपने भाषण में शाह ने कहा कि थर्ड-डिग्री टॉर्चर के दिन खत्म हो गए हैं।

कार्यक्रम में शाह ने कहा कि केंद्र भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधियनियम में बदलाव लाने की योजना बना रहा है ताकि उन्हें वर्तमान समय की जरूरतों के लिए आधुनिक और प्रासंगिक बनाया जा सके। नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) में अपने दौरान कहा शाह ने कहा कि थर्ड-डिग्री टॉर्चर की जगह 6 या इससे ज्यादा साल की सजा वाले किसी भी अपराध में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है।
शाह ने अपनी बात को पूरी तरह हुए कहा कि भारत सरकार आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम में बड़े बदलाव के लिए बातचीत कर रही है। हम उन्हें समय की आवश्यकता के अनुसार आधुनिक बनाना चाहते हैं। मेरा लंबे समय से एक सुझाव है कि जिन अपराधों में छह साल से अधिक की सजा है, उनके लिए फोरेंसिक टीम का दौरा अनिवार्य होना चाहिए।
गृहमंत्री शाह ने कहा कि थर्ड-डिग्री के दिन खत्म हो गए हैं और वैज्ञानिक साक्ष्य का उपयोग करके यहां तक कि एक कठोर व्यक्ति को भी तोड़ा जा सकता है और अगर फोरेंसिक कार्य ठीक से किया जाए तो उसे दोषी ठहराया जा सकता है। एनएफएसयू में नए सेंटर फॉर रिसर्च एंड एनालिसिस ऑफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस के बारे में शाह ने कहा कि इस देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए इस तरह के केंद्र की स्थापना करना बेहद जरूरी था।












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