'मेघालय में भगवान शिव की पूजा से हिंदुओं को रोका जा रहा', हिंदू संगठन ने खोला मोर्चा

मेघालय में हालात काफी तनावपूर्ण हैं। बांग्लादेश में तख्ता पलट के बाद भड़की हिंसा के चलते बॉर्डर पर नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के साथ अत्याचार की लगातार खबरें सामने आ रही हैं।

इस बीच हिंदू संगठन कुटुंब सुरक्षा परिषद ने मेघालय में सड़कें जाम करने की धमकी दी है। केएसपी ने आरोप लगाया है कि मावजिम्बुइन गुफा में स्थित शिव मंदिर में हिंदू श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। जिसके खिलाफ केएसपी ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

Kutumba Suraksha Parishad

हिंदुओं को पूजा से रोका जा रहा

केएसपी की ओर से कहा गया है कि पिछले हफ्ते मौसिनराम दोरबार श्नॉन्ग ने गुफा में हिंदू पूजा पर रोक लगा दी थी। यह गुफा अपनी पत्थर की संरचना के लिए प्रसिद्ध है। हिंदू धर्म को मानने वालों की इस गुफा को लेकर काफी आस्था है और उनका मानना है कि यह शिव लिंग है।

मेघायल सरकार को घेरा

केएसपी अध्यक्ष सत्य रंजन बोरा ने गुवाहाटी में मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इस प्रतिबंध को लेकर मेघायल सरकार को घेरा और इसको लेकर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि हमें मेघालय राज्य प्राधिकरण से जवाब चाहिए।

ईसाई मिशनरियों के इशारे पर हो रहा

बोराह ने आरोप लगाया कि खासी स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ने हिंदू समुदाय को धमकी दी है कि वह मासिनराम में भगवान शिव की पूजा नहीं करें। यही नहीं ईसाई मिशनरी इन छात्र संगठनों को अपना समर्थन दे रहे हैं, उनके इशारों पर ही यह सब हो रहा है।

विरोध-प्रदर्शन की धमकी

ईसाई मिशनरी के प्रभाव के चलते यहां हिंदू समुदाय शिव अर्चना नहीं कर सकता है। बोरा ने सरकार से मांग की है कि मेघालय में हिंदुओं की सुरक्षा को आश्वस्त किया जाए। अगर सरकार इसपर कार्रवाई नहीं करती है तो मेघालय सरकार को असम में भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा।

पीएम से हस्तक्षेप की मांग

बोराह ने आला अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की भी मांग की। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वे मेघालय के मुख्यमंत्री से अपना रुख स्पष्ट करने को कहें।

मावजिम्बुइन गुफा का महत्व

मावजिम्बुइन गुफा हिंदुओं के लिए बहुत धार्मिक महत्व रखती है। बोराह ने बताया कि मावजिम्बुइन गुफा में प्राकृतिक रूप से बना शिव लिंग है, जो मेघालय में रहने वाले हिंदुओं के लिए पूजा और साधना का केंद्र रहा है।

हर साल बड़ी संख्या में भगवान शिव के भक्त अपने हिंदू अनुष्ठान करने के लिए इस स्थान पर आते हैं। खासकर सावन के महीनों में यहां श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रही है। बोराह ने सवाल किया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसी हरकतें क्यों बर्दाश्त की जाती हैं।

भारत जैसे लोकतांत्रिक और सुसंस्कृत देश में, क्या आपको लगता है कि ऐसा होना चाहिए। क्या हमें इस तरह की संस्कृति-विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त करना चाहिए। मेघालय सरकार वहां क्या कर रही है? क्या वे भारत के संविधान का पालन नहीं कर रहे हैं?

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