Hindi Diwas 2022: क्या आप जानते हैं राष्ट्रभाषा, राजभाषा और मातृभाषा में अंतर, जानें क्या कहता है संविधान
भारत की विविधता ऐसी है जिसमें भाषाओं की भी भरमार है। हिंदी दिवस के मौके पर ये जानना जरूरी और रोचक है कि संविधान के मुताबिक राष्ट्रभाषा, राजभाषा और मातृभाषा में क्या अंतर है ? पढ़िए hindi diwas 2022 rajbhasha rashtrabhash
नई दिल्ली, 14 सितंबर : भारत में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में बड़ी आबादी हिंदी को मातृभाषा के रूप में भी सम्मान देती है। हालांकि, भारत के संविधान के मुताबिक राजभाषा क्या है ? मातृभाषा, राष्ट्रभाषा में क्या अंतर है ? क्या राजभाषा राष्ट्रभाषा है ? अंग्रेजी, स्पेनिश और मंडारिन भाषा के बाद हिंदी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने के मामले में चौथे नंबर पर है। मातृभाषा उर्दू के संबंध में किसी शायर ने क्या खूब लिखा- खुदा से मेरी सिर्फ एक ही दुआ है। गर मैं वसीयत उर्दू में लिखूं, बेटा पढ़ पाए। भाषाओं को बचाने के संघर्ष के बीच जानिए हिंदी से जुड़ी कुछ रोचक तथ्य-

संवैधानिक प्रावधान
राजभाषा हिंदी को अक्सर बहुसंख्यक आबादी की बोली के आधार पर राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की मांग होती है। राजभाषा विभाग के पूर्व सचिव डॉ सुमीत जैरथ के मुताबिक, संविधान निर्माताओं ने भारत की राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया गया। संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343 (1) में कहा गया कि देश की राजभाषा हिंदी और लिपी देवनागरी होगी।

विदेशी छात्र पढ़ रहे हिंदी
हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने में डॉ राजेंद्र प्रसाद का योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। हिंदी दिवस के मौके पर भाषा से जोड़ने और इसके महत्व और इतिहास को रेखांकित करने के लिए भाषण, गोष्ठी का आयोजन होता है। विदेश के छात्र भी भारत में हिंदी पढ़ने आ रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग में प्रोफेसर ने बताया कि एमए की पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों में यूरोपीय देश यूक्रेन, चीन और कोरिया के छात्र दिलचस्पी दिखाते हैं। केंद्रीय हिंदी संस्थान में 70 देशों के विद्यार्थी आते हैं।

1949 में हिंदी राजभाषा बनी
15 अगस्त 1947 को मिली आजादी के बाद भारत के सामने भाषा को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा था। भारत में हर 100-200 किलोमीटर पर बोली, भाषा और संस्कृति बदल जाती है। सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों के बीच राष्ट्रभाषा कौन सी बने, इस पर मतभेद था। संविधान सभा में मंथन के बाद 14 सितंबर 1949 को एकमत से हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया। 14 सितंबर 1953 को राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने सिफारिश की इसके बाद हर साल 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह भी दिलचस्प है कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस भी मनाई जाती है।

हिंदी जनमानस की भाषा
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1918 में आयोजित हिन्दी साहित्य सम्मेलन के दौरान हिंदी को राजभाषा बनाने की वकालत की थी। उन्होंने हिंदी को जनमानस की भाषा करार दिया और कहा, हिंदी हृदय की भाषा है। दुनियाभर में 420 मिलियन से अधिक लोग हिंदी को पहली भाषा के रूप में इस्तेमाल करते हैं। 120 मिलियन लोग हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में बोलते हैं। मातृभाषा के रूप में ब्रज, बुंदेली, मगधी और भोजपुरी जैसी भाषाएं गिनी जाती हैं। जिस क्षेत्र या प्रांत में बोली बोली जाती है, जन्म के साथ आप जो भाषाएं बोलते हैं, मातृभाषा कहलाती है।

16 साल पहले विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत
नेपाल, यूएई, न्यूजीलैंड, युगांडा, मॉरीशस, बांग्लादेश, पाकिस्तान, जर्मनी, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में बड़ी संख्या में हिंदी बोलने वाले नागरिक रहते हैं। राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद सरकारी विभागों में हिंदी का आधिकारिक इस्तेमाल किया जाता है। देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू के बाद पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने 2006 में विश्व हिंदी दिवस का ऐलान किया।

राजभाषा सप्ताह का आयोजन
कई प्रदेशों में 14 सितंबर के हिंदी दिवस के दिन से अगले सात दिनों तक राजभाषा सप्ताह मनाया जाता है। साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। हिंदी साहित्य की उल्लेखनीय रचनाओं पर जश्न और गोष्ठियों का आयोजन होता है। सरकारें राजभाषा कीर्ति पुरस्कार और राजभाषा गौरव पुरस्कार देती हैं। हिंदी दिवस पर नागरिकों और संस्थाओं के उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने के लिए लोगों को सम्मानित किया जाता है।

अंग्रेजी को सहायक राज भाषा का दर्जा
तमिलनाडु में हिंदी का उग्र विरोध देखा जाता रहा है। 1965 में हिंसक विरोध प्रदर्शन से सरकार के माथे पर बल पड़ गए। उग्र विरोध के बीच भारत की सोच बदली। विरोध प्रदर्शन हिंदी को थोपे जाने के खिलाफ था। इसके बाद भाषा नीति में बदलाव हुआ। तत्कालीन सूचना और प्रसारण मंत्री इंदिरा गांधी ने राजभाषा अधिनियम में संशोधन किया। अंग्रेजी को सहायक राज भाषा का दर्जा दिया गया।

कंप्यूटर के दौर में शब्दावली अपडेट
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक तमिलनाडु में 1937 से ही हिंदी को लेकर विरोध होता रहा है। चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की तत्कालीन सरकार ने मद्रास प्रांत में हिंदी लागू करने का समर्थन किया लेकिन स्थानीय पार्टी- द्रविड़ कषगम (डीके) ने इसका विरोध किया। मानक हिंदी के लिए पर्याप्त सरकारी हिन्दी शब्दकोष न होने के कारण हिंदी के साथ दूसरी भाषाओं के शब्द आसानी से मिल जाते हैं। स्मार्टफोन और कंप्यूटर के दौर में शब्दावली अपडेट हो रही है। ऐसे में हिन्दी पर और अधिक काम जरूरी हो गया है।

सरकार तकनीक के प्रति उदासीन
भले ही हिंदी की कीबोर्ड नहीं बना लेकिन यूनीकोड फॉन्ट्स पर काम हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट पर हिंदी भाषा का इस्तेमाल बढ़ा है। युवाओं का समूह इंटरनेट पर सक्रियता से हिन्दी कंटेंट अपलोड कर रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सएप पर भी हिंदी में लिखने और बोलने की शुरुआत हुई है। हालांकि, सरकारी कामकाज और प्रकाशनिक जगहों पर तकनीक के इस्तेमाल से हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाने में हिचकता और उदासीनता दोनों दिखाई देती है।

शब्दों में कितना समझौता करना है ?
हिंदी राजभाषा, राष्ट्रभाषा या मातृभाषा पर विमर्श के बीच सहसे अहम है ये समझना की सरकारों ने भाषाओं को दर्जा तो दिया, लेकिन भाषाओं की परवरिश जनता के भागीरथ प्रयासों से ही होगी। मातृभाषा में भी तकनीक के दौर में लिखी जा रहे शब्दों में कितना समझौता करना है, ये भाषा का इस्तेमाल करने वालों को तय करना पड़ेगा।












Click it and Unblock the Notifications