Himachal disaster relief : आपदा राहत राशि पर श्वेतपत्र जारी करे सुक्खू सरकार: अनुराग ठाकुर
हिमाचल प्रदेश में आपदा राहत राशि को लेकर सियासत तेज़ हो गई है। हमीरपुर सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि Himachal Disaster Relief Fund का सही उपयोग नहीं हुआ। उन्हो
Himachal disaster relief fund controversy: हिमाचल प्रदेश में हर साल बरसात और भूस्खलन से भारी तबाही होती है। ऐसे हालात में राहत और पुनर्वास कार्य सबसे बड़ा सवाल बन जाते हैं। इसी मुद्दे पर हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश की सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा की घड़ी में राज्य सरकार जनता को राहत देने में नाकाम रही और अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि केंद्र से आई भारी भरकम राशि आखिरकार कहाँ और कैसे खर्च की गई।

श्वेतपत्र जारी करे सरकार-अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने एक प्रेस कांफ्रेंस में साफ कहा कि जब भी किसी राज्य में आपदा आती है तो सबसे पहले राज्य सरकार नुकसान का स्टीमेट बनाकर केंद्र सरकार को भेजती है। इसके बाद केंद्र की टीमें मौके पर जाकर सर्वेक्षण करती हैं और तय करती हैं कि कितनी आर्थिक मदद दी जाएगी। यह राशि अलग-अलग मदों में आती है - SDRF (State Disaster Response Fund), SDMF (State Disaster Mitigation Fund) और NDRF (National Disaster Response Fund)।
उन्होंने कहा कि इसके बाद यह राज्य सरकार के अधीन होता है कि वह पैसा कहाँ खर्च करे। लेकिन कई बार इसका भारी दुरुपयोग जिला और राज्य स्तर पर देखने को मिलता है। ठाकुर ने कहा:
"देेखना चाहिए कि जिस ज़िले में नुकसान हुआ, क्या वहाँ पर्याप्त पैसा पहुँचा? और क्या वह पैसा उसी प्रभावित क्षेत्र में खर्च हुआ या कहीं और बाँट दिया गया? राहत राशि का 'बंदरबांट सिस्टम' नहीं होना चाहिए। राज्य सरकार को चाहिए कि एक श्वेतपत्र (White Paper) जारी करे कि केंद्र से कितनी राशि आई और उसे कहाँ-कहाँ खर्च किया गया। जब तस्वीर साफ होगी तो जनता समझ पाएगी कि केंद्र ने मदद देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। अगर कहीं कोताही हुई तो वह राज्य सरकार के विभागों में हुई है।"
तिरपाल तक नहीं पहुँचा पाई सरकार
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि जब आपदा आई तो राज्य सरकार एक साधारण तिरपाल तक प्रभावित परिवारों को नहीं दे पाई। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही लोगों के साथ अन्याय है और यह साबित करता है कि प्रदेश सरकार संकट की घड़ी में पूरी तरह विफल रही।
केंद्र से मिली कब और कितनी मदद
ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से आपदा राहत मदों में लगभग ₹3,058 करोड़ मिले हैं।
SDRF : ₹1,280.40 करोड़
SDMF : ₹319.95 करोड़
NDRF : ₹1,637.84 करोड़
इसके अलावा वर्ष 2025-26 में पुनर्वास हेतु अतिरिक्त ₹451.44 करोड़ और NDMF में ₹9.45 करोड़ भी स्वीकृत किए गए।
NDA बनाम UPA: किसने दी ज्यादा मदद?
अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र में NDA सरकार ने यूपीए शासनकाल से कई गुना अधिक मदद दी।
SDRF : UPA के 10 वर्षों में ₹947.40 करोड़, NDA के 11 वर्षों में ₹3,190.39 करोड़
NDRF : UPA में ₹553.28 करोड़, NDA में ₹2,684.87 करोड़
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल को हमेशा प्राथमिकता दी है।
2023 आपदा और पुनर्वास योजनाएं
वर्ष 2023 में आई भीषण आपदा में हिमाचल को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा था। भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने दर्जनों लोगों की जान ली थी और हजारों मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। उस समय केंद्र सरकार ने लगभग ₹3,146 करोड़ की सहायता दी थी।
इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए दिसंबर 2023 में 16,206 मकानों की स्वीकृति और सितंबर 2024 में 93,000 नए मकानों की स्वीकृति भी दी गई थी।
मैंने निजी स्तर पर भी प्रयास किये हैं - अनुराग ठाकुर
अनुराग ठाकुर ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी आपदा प्रभावितों को आर्थिक मदद, चिकित्सीय सहायता और गृह उपयोगी सामग्री उपलब्ध कराई। उन्होंने केंद्र से मांग की कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों पर आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को लेकर दीर्घकालिक अध्ययन कराया जाए। गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर एक बहु-क्षेत्रीय केंद्रीय टीम गठित करने के निर्देश भी दिए हैं।
आपदा प्रबंधन पर उठते सवाल तो हैं !
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हर साल बरसात में भूस्खलन, सड़क धंसना, पुल टूटना और मकानों के ढहने की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्य को एक दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन नीति की आवश्यकता है। राहत राशि के वितरण में पारदर्शिता, प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिकता और संसाधनों का सही उपयोग सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
कई बार देखा गया है कि जिन जिलों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, उन्हें उतनी मदद नहीं मिलती, जबकि अपेक्षाकृत सुरक्षित जिलों में भी फंड खर्च हो जाते हैं। यही कारण है कि अनुराग ठाकुर ने श्वेतपत्र की मांग उठाई है, ताकि जनता को साफ-साफ पता चल सके कि पैसा कहाँ और कैसे खर्च हुआ।
राहत कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ी - सुक्खू
कांग्रेस की सुक्खू सरकार का कहना है कि उन्होंने आपदा प्रभावितों के लिए राहत कार्य में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल दिखावा कर रही है और असल में राहत राशि का सही उपयोग नहीं हुआ।
जनता के बीच भी यह सवाल अक्सर उठता है कि केंद्र से आई मदद आखिरकार प्रभावित परिवारों तक क्यों नहीं पहुँच पाती। कई स्थानों पर लोग अब भी अस्थायी झोपड़ियों और तिरपालों में रह रहे हैं, जबकि सरकार के दस्तावेजों में उन्हें सहायता प्रदान कर दी गई बताई जाती है।
फिलहाल अनुराग ठाकुर के बयान से यह साफ़ है कि वे सुक्खू सरकार की आलोचना और हिमाचल में आपदा प्रबंधन की समूची व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र ने फंड देने में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन राज्य सरकार को चाहिए कि वह राहत राशि पर एक श्वेतपत्र जारी कर पारदर्शिता दिखाए।
इस पूरे विवाद से यह साफ है कि आपदा राहत राजनीति के लिए भी खासा मैदान देती है। लेकिन या जनता की ज़िंदगी से जुड़ा सवाल है। पारदर्शिता और जवाबदेही ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकती है।
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