Highlights: बोले पीएम मोदी- शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम होना चाहिए, पढ़ें गवर्नर कॉन्फ्रेंस की खास बातें
नई दिल्ली। सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई शिक्षा नीति पर आयोजित राज्यपालों की कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया, आपको बता दें कि सरकार की ओर से बीते दिनों ही नई शिक्षा नीति का ऐलान किया गया है, इस बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के लक्ष्यों को शिक्षा नीति और व्यवस्था के जरिए ही पूरा किया जा सकता है, पीएम ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम होना चाहिए। आपको बता दें कि इस सम्मेलन में राष्ट्रपति और पीएम के अलावा सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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आइए एक नजर डालते हैं इस कॉन्फ्रेंस की खास बातों पर
- पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक जुड़े होंगे, छात्र जुड़े होंगे, उतना ही उसकी प्रासंगिकता और व्यापकता, दोनों ही बढ़ती है।
- पीएम ने कहा कि देश के लाखों लोगों ने, शहर में रहने वाले, गांव में रहने वाले, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने, इसके लिए अपना फीडबैक दिया था, अपने सुझाव दिए थे, जिस पर अमल करते हुए इस शिक्षा नीति पर काम हुआ है।
- पीएम ने कहा कि शिक्षा नीति में सरकार, उसका दखल, उसका प्रभाव, कम से कम होना चाहिए ।
- पीएम मोदी ने कहा कि गांव में कोई शिक्षक हो या फिर बड़े-बड़े शिक्षाविद, सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अपनी शिक्षा शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में एक भावना है कि पहले की शिक्षा नीति में यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। ये एक बहुत बड़ी वजह है राष्ट्रीय शिक्षा नीति की स्वीकारता की।
- पीएम ने कहा कि ये पॉलिसी देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक नॉलेज और स्किल्स, दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी।
- पीएन ने कहा कि 21वीं सदी में भी भारत को हम एक नॉलेज इकॉनमी बनाने के लिए प्रयासरत हैं। नई शिक्षा नीति ने ब्रेन ड्रेन को टैकल करने के लिए और सामान्य से सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए भी बेस्ट इंटरनैशनल इंस्टिट्यूशंस के कैंपस भारत में स्थापित करने का रास्ता खोला है।
- तो वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं के अनुरूप देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी। यह केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षार्थियों एवं नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
- राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली ही जीवंत लोकतान्त्रिक समाज का आधार होती है। अतः सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली ही जीवंत लोकतान्त्रिक समाज का आधार होती है। अतः सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।
- राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से हमें ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ विश्व-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत हों और सही अर्थों में ग्लोबल सिटिजन बन सकें।












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