सोनिया पर दहाड़े नरेन्‍द्र मोदी कहा, कोई मां अपने बेटे की बलि नहीं चढ़ाना चाहती

Narendra Modi
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। राजधानी के रामलीला मैदान में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नरेंद्र मोदी ने अपना भाषण भारत माता की जय से शुरू किया। उसके बाद पार्टी के पदाधि‍कारियों का अभि‍नंदन किया। भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि मित्रों दो दिन से हम विस्तार से देश की चिंताओं पर चर्चा कर रहे हैं। देश आजाद होने के बाद चुनाव बहुत आये। हमें चुनाव में कार्य करने का अनुभव है। लेकिन अगर सारे चुनावों को देखें, तो 2014 के चुनाव हर प्रकार से भिन्‍न हैं। क्योंकि इससे पहले देश की ऐसी दुर्दशा कभी नहीं देखी।

देश नेताविहीन हो, नीतिविहीन हो ऐसा कभी नहीं हुआ। भ्रष्टाचार इतना ज्यादा हो, रोजगार के लिये भटकता नौजवान, इज्जत बचाने के लिये परेशान मां और बहनें, महंगाई की मार से तड़प रहे भूखे बच्चे। ऐसी दुर्दशा कभी नहीं देखी। मोदी ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हुई। देश भर से उनके कार्यकर्ता उम्मीद लेकर आये थे कि उन्हें पीएम उम्मीदवार मिलेगा, लेकिन बदले में मिले तीन गैस के सिलेंडर। कांग्रेस कहती है कि यह उनकी लोकतांत्रिक परंपरा का हनन हुआ।

उनकी लोकतांत्रिक परंपरा तब कहां थी, जब सभी कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, और अचानक जवाहर लाल नेहरू को अचानक पीएम बना दिया गया। तब से लेकर आज तक बंद कमरे में एक दो लोग फैसला लेते आ रहे हैं। उदाहरण मनमोहन सिंह भी हैं। मनमोहन सिंह को कोई कांग्रेसी प्रधानमंत्री नहीं बनाना चाहता था, लेकिन सोनिया गांधी ने फरमान जारी किया और सबको मानना पड़ा। खैर वैसे भी कोई मां अपने बेटे की बलि नहीं चढ़ा सकती। आखिरकार एक मां का यही मन कर गया कि मेरे बेटे को बचाओ।

कहां चाय वाला कहां आलीशान परिवार में पैदा हुए राजकुमार

भईयों आज कल चाय वालों की बड़ी खातिरदारी हो रही है। देश का हर चाय वाला सीना तान कर घूम रहा है। इनका चुनाव से भाग जाने का कारण एक यह भी है। जिस परंपरा में वो पले बढ़े हैं, जिस प्रकार लग्जरी लाइफ जी है, सी प्रकार उनके मन की रचना भी वैसे ही हो गई है। तब उनको विचार आता है। लोकसभा का चुनाव महत्वपूर्ण है, कांग्रेस को जीतना भी है, लेकिन एक चाय वाले से भिड़ना, बड़ी शर्मिंदगी हो रही है, एक चय वाले से मेरी टक्कर क्यों। भईयों वो नाम दार हैं हम कामदार हैं। 27 अक्टूबर को पटना के गांधी मैदान में जिस तरह जन सैलाब डटा हुआ था। उसे देख मुझे वो प्रेरणा याद आ गई, वो आग, वो तड़पन याद आ गई, जो आजादी के वक्त लोगों में दिखाई देती थी। 2014 का चुनाव वही तड़पन लेकर आया है। तब लोगों ने स्वराज के लिये जीवन दिया, नई पीढ़ी सुराज्य के लिये जीने के लिये प्रेरित हो रही है।

पश्च‍िम से पूरब तक

भाईयों बहनों भारत मां का पश्च‍िमी हिस्सा तो कहीं न कहीं विकास की डोर से बंधा हुआ है, लेकिन पूर्वी हिस्सा विकास की यात्रा में बहुत पीछे है। भारतीय जनता पार्टी को मौका मिलेगा तो हम भारत मां की इस दूसरी भुजा को दुर्बल से शक्तिशाली बनायेंगे चाहे बिहार हो, बंगाल हो, नॉर्थ ईस्ट हो, सबका विकास करना चाहते हैं। अगर हमें देश को मजबूत बनाना है, तो रीजनल एस्प‍िरेशन को संकट नहीं समझना चाहिये। रीजनल एस्प‍िरेशन को दिल्ली की सरकार बोझ की तरह देखती है। वो चुनौती नहीं, वो अवसर है। हर राज्य में आगे बढ़ने की ललक है, अगर सब दिल्ली से जुड़ जायें, तो हमारा देश बहुत आगे बढ़ सकता है।

हमारा देश संघीय ढांचा है। यह संविधान की धाराओें में सिमट नहीं सकता। हमें हर भाग की इज्जत करनी होगी। भाईयों मेरे लिये बड़े आनंद का विषय है कि मैं मुख्यमंत्री पद पर रहा हूं, पार्टी ने मुझे नये दायित्व के लिये पसंद किया है। एक मुख्यमंत्री के नाते संघीय ढांचे का महत्व क्या होता है मैं इसके भलीभांति महसूस करता हूं। मैं अनुभवी होने के कारण हर राज्य के दु:ख को समझ सकता हूं। भाईयों इसीलिये भाजपा की सरकार संघीय ढांचे को सशक्त बनाने में रुचि रखती है। आज बिग ब्रदर वाला एटीड्यूड है- हम दिल्ली वाले हैं हम राज्यों को कुछ देते हैं। ये शोभा नहीं देता।

ट्रैक रिकॉर्ड चाहिये

प्रधानमंत्री कहते हैं कि उनकी एक कैबिनेट की टीम है, जो देश चला रही है। मैं कहता हूं कि प्रधानमंत्री को केंद्र की जगह देश के मुख्यमंत्रियों के साथ एक टीम बनानी चाहिये। वो टीम ही देश को आगे ले जायेगी। हमारी सोच कहती है कि केंद्रीय ब्यूरोक्रेसी राज्यों की ब्यूरोक्रेसी के साथ टीम बनाये। गुड गवरनेंस अमीरों के लिये नहीं गरीब के लिये होती है। अमीर हर चीज खरीद सकता है, लेकिन गरीब नहीं। गरीब तो तभी खुश होगा जब गुड गवरनेंस हो। भईयों अब समय आ गया है, जब हमें टेप रिकॉर्डर नहीं ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करना होगा। ऐक्ट, ऐक्ट, ऐक्ट बहुत सुन लिया, अब ऐक्शन चाहिये। पिछले दस साल में प्रधानमंत्री जी हर रोज कमेटियां बना रहे हैं। हर समस्या के लिये कमेटी, हमें कमेटी नहीं, कमिटमेंट चाहिये।

इंद्रधनुष के रंगों में हैं हमारे देश की नीति और संस्‍कृति

इंद्र धनुष का पहला रंग- भारतीय संस्कृति की महान विरासत कुटुंब प्रथा। परिवार व्यवस्था, हजारों साल से परिवार व्यवस्था ने हमें बनाया है, बचाया है। इसे कैसे सशक्त बनायें, हमारी नीतियां इसे सशक्त बनायेगी।

दूसरा रंग है हमारी कृषि, हमारे पशु, हमारे गांव। हमें कृषि को नई तकनीकियों से जोड़ना होगा। तभी कृषि उन्नति की ओर जा सकेगी।

तीसरा रंग है भारत की नारी, आज इंद्र धनुष के इस रंग को कहां लाकर छोड़ दिया है। अगर इंद्र धनुष को सुंदर बनाना है, तो महिलाओं का सशक्तिकरण जरूरी है।

चौथा रंग है जल, जमीन, जंगल, जलवायु- हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों को बचाना होगा।

पांचवां रंग है युवा धन, युवा शक्ति- जिस देश के पास इतना बड़ा डेमोग्राफिक डिवीजन हो, इतनी बड़ी युवा शक्त‍ि हो। आने वाले समय में वर्क फोर्स में संकट आने वाला है। अगर आज हमने युवाओं को उसके लिये तैयार कर लिया होता तो आज हमारे युवा भारत ही नहीं पूरे विश्व का निर्माण कर रहे होते। पश्च‍िमी सभ्यता के प्रभाव के कारण कहीं ये रंग फीका तो नहीं पड़ रहा है। भाईयों राजनीति से परे उठकर हमारा दायित्व बनता है कि हमें अपने नौजवानों को ड्रग्स आदि से बचायें। जीरो टॉलरेंस बनाना होगा। विदेशों से स्मगलिंग होती है, तो उसे रोकें। हमें अपने युवा धन का महत्व समझना होगा।

छठा रंग है- लोकतंत्र। जिस देश के पास डेमोक्रेटिक डिवीजन हो, वो दुनिया की बड़ी ताकत बन सकता है। यही हमारी ताकत है, जिससे हम विश्व के किसी भी देश की आंख में आंख मिला सकते हैं। इसे और ताकतवर बनाना होगा।

सातवां रंग- ज्ञान है। हम ज्ञान के उपासक हैं। हर मां अपने बेटे को आशीर्वाद देती है कहती है पढ़लिख कर आगे बढ़ना। हमारे इंद्र धनुष के इस महत्वपूर्ण रंग को कितना शक्ति‍शाली बनाना है, यह हमें सोचना होगा।

कांग्रेस और भाजपा की तुलना

मोदी ने कहा उनकी सोच है भारत मधु मक्खी का छाता है, हम कहते हैं ये हमारी भारत माता है। वे कहते हैं गरीबी मन का भ्रम है, हम कहते हैं गरीब मारे लिये दरिद्र नारायण है। उनकी सोच है पैसे पेड़ पर नहीं उगते, हमारी सोच है पैसे खेत और खलिहानों में उगते हैं। वो कहते हैं गरीबी पर बात न करें तो मजा नहीं आता, हम कहते हैं गरीबों को देख रात को सो नहीं पाते।
उनकी सोच है, समाज तोड़ो, राज करो, हमारी सोच है समाज को जोड़ो विकास करो। उनकी सोच है वंशवाद, हमारी सोच है राष्ट्रवाद, उनकी सोच है सत्ता कैसे बचायें, हमारी सोच है देश कैसे बचायें। अभी उन्होंने कहा कि चुनाव में टिकट उसे देंगे जिनके दिल में कांग्रेस है, हम टिकट उसे देंगे जिनके दिल में भारत माता है। मैं देश वासियों से प्रार्थना करता हूं, आपने 60 साल शासकों को दिये, 60 महीने सेवक को देकर देखो। देश की सेवा करने का हर किसी को अवसर मिले अब यही मांग है।

भारत के भविष्य की बातें

आज हमें नहीं मालूम कि बीस साल बाद कितने शिक्षकों की जरूरत पड़ेगी। हमें ऐसा डाटाबेस तैयार करना होगा, जो हमें बताये कि आने वाले समय में क्या-क्या संभावनाएं हैं। उसी हिसाब से हर क्षेत्र में स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाना चाहिये। नेक्स्ट जैनरेशन के लिये इंफ्रास्ट्रक्चर अभी से डेवलप किया जाना चाहिये। हमारे पास इतनी बड़ी रेलवे है, दुर्भाग्यवश हमारे देश में रेलवे का उत्थान नहीं किया गया। इस क्षेत्र में चीन जापान आगे निकल गये। क्यों न रेवले की अपनी चार यूनिवर्सिटी क्यों न हो। विचार कोई करे, बस सोच का सवाल है। रेलवे हिन्दुस्तान की इतनी बड़ी ताकत बन सकता है, आप इसका अंदाजा नहीं लगा सकते। देश में बुलट ट्रेन लाया जा सकता है। कम से कम चार दिशाओं में तो बुलट ट्रेन चलायी ही जा सकती है।

आज विश्व के अंदर हम अलग-थलग हिंदुस्तान के तौर पर हम नहीं सोच सकते। हमारे देश में गुनहगार कौन है, यह मैं चर्चा नहीं कर रहा हूं, लेकिन हमारी माता-बहनों के साथ जो हो रहा है, उससे हम दुनिया में मुंह दिखाने काबिल नहीं हैं। हमें समाज में ऐसी व्यवस्था बनानी होगी। हमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के मिशन को आगे बढ़ाना होगा। भाईयों हमें अब नारी की तरफ देखने का दृष्टिकोण बदलना होगा। हमें अब अपने देश की नारी को नेशन बिल्डर के रूप में देखें। ऐसा करने से हम एक नई शक्ति के रूप में उभर सकते हैं। हमारे देश का एक दुर्भाग्य रहा, कि जिस समय शहरीकरण को एक अवसर मानना चाहिये था, हमने शहरीकरण को चैलेंज मान लिया। इसे एक अवसर मानना चाहिये। विकास के अंदर एक मॉडल के अंतर्गत स्वीकार करना चाहिये।

क्यों न हमारे देश में 100 नये शहर बनें, स्मार्ट सिटी बने, आवश्यकता के अनुसार स्पोर्ट्स सिटी बने, एजुकेशन सिटी बने। दो शहर जो पास-पास हों, उनके लिये जुड़वां शहर का कॉनसेप्ट डेवलप करना चाहिये। जैसे न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी है। उसी प्राकर से बड़े शहरों के आस-पास सेटैलाइट सिटीज़ का जाल बनाना चाहिये। सोचिये जब इतना सारा काम होगा, तो कितनों को रोजगार मिलेगा, आप उसका अंदाजा नहीं लगा सकते। क्या गरीब के पास घर नहीं होना चाहिये। क्यों न हम करोड़ों मकान बनाने का सपना लेकर आगे बढ़ें। जल, जमीन, जंगल, कृषि, पशु के बिना देश नहीं चलेगा। प्रोडक्ट‍िविटी बढ़े इस पर जोर देंगे। एक-एक बूंद पानी से फसल कैसे पैदा हो, नई प्रकार की फसलों पर क्या किया जाये। नदियों को जोड़ने का संकल्प जो अटल जी ने लिया है, उस काम को हमें आगे बढ़ाना है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+