'ऐसा लग रहा कलयुग आ गया', जब बुजुर्ग दंपति की याचिका पर जज साहब भी खुद को रोक नहीं सके
इलाहाबाद हाई कोर्ट में बुजुर्ग दंपति के बीच गुजारा भत्ता का विवाद पहुंचा है। इस विवाद की सुनवाई के दौरान जज भी खुद को यह कहने से रोक नहीं सके कि ऐसा लगता है कि कलयुग आ गया है। दरअसल बुजुर्ग दंपति जिनकी आयु 75-80 वर्ष के बीच है, ऐसे में उम्र के इस पड़ाव में गुजारा भत्ता का विवाद लेकर जिस तरह से यह दंपति कोर्ट पहुंचा है, वह अपने आप में पीड़ादायक है।
मुनेश कुमार गुप्ता जोकि अलीगढ़ के रहने वाले हैं, उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मुनेश कुमार की पत्नी के पक्ष में फैसला सुनाया। जस्टिस सौरभ श्याम ने कहा कि यह कानूनी मसला चिंताजनक है, उन्होंने दंपति को फैसला सुनाते हुए सलाह भी दी।

मुनेश कुमार गुप्ता की पत्नी ने उनसे गुजारा-भत्ता मांगा है, जिसपर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। लेकिन कोर्ट के आदेश को मुनीश गुप्ता ने चुनौती दी और पत्नी को एक नोटिस भेजा। जिसपर हाई कोर्ट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगली सुनवाई में दोनों के बीच समझौता हो जाएगा।
गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ शाय शमशेरी ने प्रतिवादी पत्नी को नोटिस जारी किया, न्यायालय ने उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई की तारीख तक दोनों पक्ष समझौता कर लेंगे।
बता दें कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कानूनी प्रावधान, उन पति-पत्नी के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है, जिनके पास खुद का भरण-पोषण करने के साधन नहीं हो सकते हैं।
यह विवाद उच्च न्यायालय में पहुंचा, जहां अदालत ने मुनेश गुप्ता को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी को भरण-पोषण के लिए 3,000 रुपये प्रति माह दें। लगभग 15,000 रुपये की मासिक पेंशन के बावजूद मुनेश कुमार गुप्ता अपनी पत्नी को गुजारा-भत्ता नहीं देना चाहते हैं। मुनेश अपने बड़े बेटे के साथ किराए के घर में रहते हैं, जबकि पत्नी अपने छोटे बेटे के साथ अपने घर में रहती हैं। यह घर मुनेश गुप्ता की पत्नी के नाम पर है।












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