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Karnataka: येदुरप्पा को 15 दिन का समय दिए जाने पर राज्यपाल पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल

By Ankur Singh
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    नई दिल्ली। कर्नाटक में फ्लोर टेस्ट को लेकर जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया उसके बाद येदुरप्पा सरकार ने इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानून के जानकार कौनियन शेरिफ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया। सुप्रीम कोर्ट या फैसला दो ऐसे मामलों के फैसले पर निर्धारित था, जिसे सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 1998 में पास किया था। इसमे सीजेआई एससी अग्रवाल, केटी थॉमस ने अपना फैसला सुनाया था। इन जजों ने अपने फैसले में कहा था कि हमने दोनों पक्षों को सुना है, 26 फरवरी को उत्तर प्रदेश की विधानसभा का सत्र होगा, जिसका एकमात्र मकसद फ्लोर टेस्ट करना है, ताकि इस बात की जानकारी मिल सके कि किस दल के पास बहुमत है और किस दल का मुख्यमंत्री होना चाहिए। इसके बाद 27 फरवरी को इसका नतीजा कोर्ट में सुनाया जाना था।

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    कल्याण सिंह सरकार का फ्लोर टेस्ट

    27 फरवरी 1998 में कोर्ट को स्पीकर द्वारा जानकारी दी गई है कि सदन में फ्लोर टेस्ट शांतिपूर्वक हुआ, इसके बाद 225 वोट कल्याण सिंह को मिला और 196 वोट जगदंबिका पाल को मिला। कोर्ट के इस फैसले के 20 साल बाद एक बार फिर से कर्नाटक में समय सीमा के भीतर येदुरप्पा सरकार को बहुमत साबित करने के लिए कहा गया , लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर से साबित हो गया है कि चुनाव और संसद से संबंधित मुद्दों के लिए कोर्ट काफी अहम है।

    कर्नाटक में राज्यपाल अपनी जिम्मेदारी भूले

    वहीं कर्नाटक के राज्यपाल वजूभाई ने जिस तरह से येदुरप्पा सरकार को 15 दिन का समय बहुमत साबित करने के लिए दिया था, उसपर केटी थॉमस ने कहा कि हर राज्यपाल अपना पद ग्रहण करते वक्त शपथ लेता है कि वह अपनी जिम्मेदारीको निष्ठापूर्वक निभाएगा, लेकिन अक्सर इस तरह की बात सामने आती है जब राज्यपाल राजनीति से प्रेरित होकर अपना फैसला देते है। कर्नाटक के मामले में राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता दिया, लेकिन वह यह देखना भूल गए कि किस गठबंधन के पास सबसे अधिक सीट है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस मामले में राज्यपाल तमाम चीजों का सही आंकलन नहीं लगा सके और उन्होंने स्थिति के अनुसार अपना फैसला नहीं दिया।

    महाभियोग का प्रस्ताव गलत

    जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ संसद में कांग्रेस महाभियोग का प्रस्ताव लेकर आई उसपर थॉमस ने कहा कि भारत में राजनीतिक दल स्कूली बच्चों की तरह हैं, मेरा मानना है कि कांग्रेस का सीजेआई के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाना गलत फैसला था और उन्हें किसी ने गलत सलाह दी थी। कांग्रेस के इस कदम ने गलत उदाहरण पेश किया है। मैंने एक वकील से कहा था जोकि महाभियोग के पक्ष में था कि आपको हमला मारने के लिए करना चाहिए, ऐसे में अगर महाभियोग लाने के बाद वह पास नहीं होता है तो इससे ना राजनीतिक दलों को ही नुकसान होगा देश की सर्वोच्च अदाल की साख को भी बट्टा लगेगा।

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    English summary
    Here is what top jurist has to say on Karnataka floor test and the role of governor.

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