PNB Scam: आखिरकार एसबीआई के चेयरमैन ने तोड़ी चुप्पी, घोटाले की वजह बताई
नई दिल्ली। नीरव मोदी की कंपनी को जिस तरह से पीएनबी ने फर्जी तरीके से एलओयू जारी किए उसके बाद देशभर की बैंकिंग प्रणाली पर सवाल खड़ा हो गया है। इस पूरे घोटाले पर एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह एक हद तक सिस्टम को सही तरीके से लागू नहीं करने को दर्शाता है, जिसकी वजह से इतना बड़ा धोखा हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक में लेनदेन के दौरान कई तरह के रिस्क होते हैं, हर वित्तीय लेनदेन में मानवीय प्रक्रिया की जरूरत होती है और वहां गड़बड़ी की गुंजाइश हमेशा रहती है। इन रिस्क को कम करने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन किया जाना जरूरी है। पीएनबी में जो कुछ भी हुआ है वह सभी के लिए सबक है और आगे सभी बैंकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

हम उठाएंगे सख्त कदम
एसबीआई के चेयरमैन से जब पूछा गया कि क्या आपके बैंक ने इन लोगों को लोन दिया है तो उन्होंने कहा कि हमने नीरव मोदी या उनकी कंपनी को किसी भी तरह का कोई फंड नहीं दिया है। हमने पीएनबी के एलओयू पर भरोसा करते हुए उन्हें फंड दिया था, लिहाजा एसबीआई ने जो भी रकम दी है उसकी पूरी जिम्मेदारी पीएनबी की है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद हम अपने बैंक के भीतर तकनीक को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे बैंक में स्विफ्ट से एलओयू भेजने के लिए सीबीएस से जुड़ा होना आवश्यक है। हमने इस बात को भी सुनिश्चित किया है कि अहम और संवेदनशील पद पर कोई भी व्यक्ति तीन वर्ष से अधिक समय तक नहीं रहे। इन पदों पर लगातार निगरानी की जाती है, आने वाले समय में इस तरह की किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए हम और सख्त कदम उठाएंगे।

न्यूनतम बैलेंस पर दिया जवाब
एसबीआई ने जिस तरह से न्यूनतम बैलेंस पर लोगों से शुल्क लिया है उसपर रजनीश कुमार ने कहा कि हमारे डेबिट कार्ड को जब दूसरे बैंक के एटीएम में इस्तेमाल किया जाता है तो हमपर 7-14 रुपए का बोझ पड़ता है, कुल बैंकिंग शाखाओं में हमारी हिस्सेदारी महज 14 फीसदी है, लेकिन कुल ग्राहकों में हिस्सेदारी हमारी 40 फीसदी है, हम बड़ी संख्या में लोगों को मुफ्त बैंकिंग सुविधा देते हैं, जिसमे विद्यार्धी, किसान, पेंशनभोगी, गरीब और छोटे व्यापारी शामिल हैं। साथ ही हर वर्ष हम 3000 करोड़ रुपए तकनीक को बेहतर करने पर खर्च करते हैं। बावजूद इसके हम न्यूनतम राशि पर लिए जाने वाले शुल्क पर विचार कर रहे हैं।

एनपीए की समस्या होगी खत्म
एनपीए की समस्या पर रजनीश कुमार ने कहा कि इसकी पहचान की प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है और इसकी वसूली अब शुरू हो चुकी है। पहले चरण में 12 एनपीए खातों की पहचान की गई है, इन लोगों की संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। साथ ही बडे़ कारोबारियों को लोन देने की प्रक्रिया को और मजबूत और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिससे की कर्ज देने में जोखिम को कम किया जा सके बड़े कॉरपोरेट को कर्ज देने और उनके प्रस्तावों को मंजूरी देने की प्रक्रिया और पारदर्शी व मजबूत बनाई जाएगी। कर्ज प्रस्तावों को मंजूरी देने वाला विभाग पूरी तरह से अलग होगा। इससे कर्ज देने में जोखिम को बहुत हद तक कम किया जा सकेगा। एनपीए अब बढ़ेगा नहीं। दिसंबर, 2018 तक इसमें काफी कमी आएगी।
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