दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ने की ये हैं 5 बड़ी वजह
नई दिल्ली। कोरोना वायरस का संक्रमण पिछले कुछ हफ्तों में एक बार फिर से दिल्ली में बढ़ गया है। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं, उसने केजरीवाल सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि वह एक हफ्ते के भीतर कोरोना की जांच को दोगुना बढ़ाकर इसे 40 हजार तक पहुंचाएंगे। खुद केजरीवाल ने इस बात को स्वीकार किया है कि दिल्ली में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। केजरीवाल ने कहा कि लोगों से कोरोना के लिए जारी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। पिछले दिनों दिल्ली में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी की कुछ अहम वजहे हैं, आईए डालते हैं उनपर एक नजर।

मास्क को नजरअंदाज करना
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में लोग मास्क पहनने को लेकर गंभीर नहीं हैं जिसकी वजह से शहर में कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि पुलिस ने लोगों को मास्क नहीं पहनने पर फाइन बढ़ा दिया है और बड़ी संख्या में लोगों से मास्क नहीं पहनने की वजह से जुर्माना लिया गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली पुलिस ने 23 अगस्त तक 175000 लोगों पर मास्क नहीं पहनने की वजह से जुर्माना लगाया। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अच्छा है कि दिल्ली के लोग आत्मविश्वास से लबरेज हैं लेकिन उन्हें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, लोगों को हमेशा मास्क पहनना चाहिए। मंगलवार को आईसीएमआर के डायरेक्टर बलराम भार्गव ने कहा था कि जो लोग मास्क नहीं पहन रहे हैं, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं वह देश में कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं।
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शहरों को फिर से खोला जाना
कोरोना संकट में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जो गाइडलाइन जारी की गई, उसमे कहा गया कि लोगों को भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए। जब भीड़ में लोग एक दूसरे के करीब आते हैं तो आप पर कोरोना का खतरा सबसे अधिक होता है क्योंकि ऐसे में कम से कम 1 मीटर की दूरी को बनबाए रखना काफी मुश्किल होता है। दिल्ली में जिस तरह से मार्केट, मॉल, रेस्टोरेंट, होटल आदि को खोला गया उसने भी कोरोना के मामलों में इजाफे किए। इस बीच दिल्ली मेट्रो को भी चलाने की बात हो रही है, जिसमे प्रति दिन 25 लाख लोग सफर करते हैं।

टेस्टिंग कम होना
जिस तरह से कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा हो रहा है उसके लिहाज से कोरोना टेस्टिंग की रफ्तार काफी धीमी है। सात दिन के औसत कोरोना टेस्टिंग की बात करें तो यह प्रतिदिन औसत तकरीबन 17924 है। जबकि 9 जुलाई को दिल्ली में सर्वाधिक 21660 लोगों का टेस्ट हुआ था। हालांकि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि है कि वह अगले हफ्ते तक टेस्टिंग को प्रतिदिन 40 हजार तक पहुंचाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि टेस्टिंग बढ़ने से कोरोना के मामलों में भी इजाफा हो सकता है।

आंकड़ों में अंतर
कोरोना के आंकड़ों पर नजर डालें तो इसके विश्लेषण में एक बात यह सामने आई है कि कोरोना के मामले एकदम से बढ़ सकते हैं और एकदम से गिर भी सकते हैं। दरअसल संक्रमण की जानकारी मिलने में लगने वाला अधिक समय, मरीजों की उम्र आदि काफी अहम भूमिका निभाती है, यही वजह है कि संक्रमण के मामलों की सटीक जानकारी मिल पाना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में कोरोना संक्रमित की जानकारी मिलने में 1 से 12 दिन का समय लग जाता है। यही वजह है कि 11वें दिन संक्रमण के मामलों में एकदम से इजाफा देखने को मिलता है।

कोरोना सेकेंड वेव
सरकार और विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर अभी नहीं आई है, लेकिन इस बात की संभावना से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि भविष्य में कोरोना की दूसरी लहर नहीं आ सकती है। कई ऐसे देश जिनकी कोरोना को नियंत्रित करने के लिए तारीफ की गई थी, वहां दोबारा कोरोना संक्रमण की वापसी देखने को मिली थी। यूरोप में इटली, जर्मनी, स्पेन में कोरोना की दूसरी लहर देखने को मिली। हालांकि अच्छी बात यह थी कि दूसरी लहर पहली की तुलना में काफी हल्की थी।












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