राहुल-प्रियंका के हाथरस जाने पर बोले मुख्तार अब्बास नकवी, घटना को 'राजनीतिक पर्यटन' ना बनाएं
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हाथरस मामले को लेकर राहुल और प्रियंगा गांधी को निशाने पर लिया है।
नई दिल्ली। हाथरस में दलित लड़की के साथ हुई दरिंदगी और अमानवीयता के मामले को लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार घिरती हुई नजर आ रही है। इस मामले को लेकर जहां मानवाधिकार आयोग ने यूपी सरकार और पुलिस को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है, तो विपक्ष भी योगी आदित्यनाथ पर हमला बोल रहा है। वहीं, गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस रवाना हो गए। इस बीच केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने हाथरस मामले को लेकर राहुल और प्रियंगा गांधी को निशाने पर लिया है।

'दोषियों को सजा मिलेगी, लेकिन राजनीतिक पर्यटन ना बनाएं'
मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हाथरस में जो बर्बरता हुई, उसके लिए दोषियों का निश्चित रूप से सजा दी जाएगी, लेकिन ऐसी घटनाओं को लेकर यूपी में 'राजनीतिक पर्यटन' नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि बीते 14 सितंबर को यूपी के हाथरस में एक दलित लड़की के साथ गैंगरेप किया गया था। गैंगरेप के बाद पीड़िता को टॉर्चर भी किया गया। पीड़िता की हालत बिगड़ने के बाद इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार को उसने दम तोड़ दिया। राहुल और प्रियंका गांधी आज पीड़ित परिवार से मिलने के लिए हाथरस जा रहे हैं।
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'तनाव बढ़ाने की कोशिश ना करें'
राहुल गांधी और प्रियंका के हाथरस जाने को लेकर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'जांच टीम इस मामले में जांच कर रही है। लेकिन, जो लोग राजनीतिक पर्यटन के जरिए वहां तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। घटना को लेकर हर कोई दुखी है और सब चाहते हैं कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। यूपी सरकार दोषियों को सजा दिलाने के लिए काम कर रही है और जल्दी ही इसका परिणाम भी देखने को मिलेगा।'

हाथरस जिले की सीमाएं सील
वहीं, मामले को लेकर हाथरस के डीएम ने बयान देते हुए कहा कि जिले की सीमाएं पूरी तरह सील हैं और जनपद में धारा 144 लागू की हुई है। किसी भी स्थान पर चार से ज्यादा लोगों को एक साथ जमा होने की अनुमित नहीं है। डीएम ने बताया कि अभी तक उनके पास राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के हाथरस आने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से केवल एसआईटी टीम को मिलने की इजाजत है। आपको बता दें कि मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन करते हुए 7 दिनों के अंदर घटना की रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।












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