Hate Speech FIR: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 अगस्त तक टली, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा पर प्राथमिकी का है मामला
Hate Speech FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई अगस्त तक टाल दी है। याचिका मार्क्सवादी नेता बृंदा करात की है। सुनवाई अगस्त में के साथ भाजपा नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होने की संभावनाओं पर विचार भी टल गया है।

भड़काऊ भाषण प्राथमिकी (Hate Speech FIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा के खिलाफ बृंदा करात की याचिका पर सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए स्थगित। याचिका में दोनों भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर का निर्देश देने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मार्क्सवादी- सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात द्वारा दायर याचिका में दिल्ली दंगों के दौरान 2020 में नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोप लगाए गए हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने सुनवाई स्थगित कर दी।
दिल्ली पुलिस को याचिका में अपना हलफनामा दायर करने के लिए कहते हुए, पीठ ने मामले को 14 अगस्त को सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा था।
तब सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से यह कहा गया था कि प्रथम दृष्टया मजिस्ट्रेट का यह कहना कि भाजपा के दो नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मंजूरी की जरूरत है, सही नहीं हो सकता है।
शीर्ष अदालत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेताओं करात और केएम तिवारी द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय के 13 जून, 2022 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें हाईकोर्ट ने ठाकुर और वर्मा के खिलाफ उनके कथित घृणास्पद भाषणों के लिए निचली अदालत के प्राथमिकी पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि कानून के तहत मौजूदा तथ्यों में एफआईआर दर्ज करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से अपेक्षित मंजूरी लेनी जरूरी है।
उच्च न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया कि दिल्ली पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की थी और निचली अदालत को सूचित किया था कि प्रथम दृष्टया कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, किसी भी जांच का आदेश देने के लिए, निचली अदालत को तथ्यों का संज्ञान लेना जरूरी है। दोनों नेताओं ने 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भाषण दिए थे, जब शहर में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध चल रहा था।












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