सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हेट स्पीच का त्याग करना मुलभूत जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने की टिप्पणी

सर्वोच्चय न्यायालय ने कहा कि शिकायत दर्ज करने से हेट स्पीच की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पूछे जाने पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि 18 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Hate Speech: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भड़काऊ भाषण के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भड़काऊ या अभद्र भाषा का त्याग कर देना चाहिए। यह मूलभूत आवश्यकता है। जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की एससी बेंच ने हेट स्पीच मामले में सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

बेंच ने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नफरती भाषा का त्याग करना एक मूलभूत आवश्यकता है। उच्चतम न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से यह भी पूछा कि शिकायत दर्ज करने से भड़काऊ भाषण की समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। साथ ही कहा कि एफआईआर दर्ज करने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।

सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि नफरत फैलाने वाले भाषणों के मामले में 18 प्राथमिकी दर्ज की गई है। सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज की आपत्ति के बावजूद मामला बुधवार को सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया था।

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      भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, इसको देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने दोषियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था। पिछले साल 21 अक्टूबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों को अभद्र भाषा के मामलों पर कड़ी कार्रवाई करने और शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना सुप्रीम कोर्ट ने मामले दर्ज करने का निर्देश दिया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई करने में प्रशासन की ओर से कोई भी देरी अदालत की अवमानना ​होगी।

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