पलटे पटेल कहा मोदी ने नहीं खिलाया आडवाणी को खाना तो मैं कौन

बीते दिनों नरेंद्र मोदी ने भावुक होकर प्रियंका को अपनी 'बेटी' जैसा बताया तो प्रियंका वाड्रा ने सख्त लहज़े में उनका प्रेमपूर्ण संबोधन मीडिया के सामने ठुकरा दिया। सवाल उठने लाजिमी थे। एक ओर मोदी ने चुनावी सहालग में इंटरव्यू की जो रस्म अदायगी शुरु की है, उससे विरोधी पहले ही नाखुश हैं। अब खबर है कि मोदी के इंटरव्यू में छेड़छाड़ होने लगी है।
अहमद पटेल का तीखा पलटवार - पटेल ने मोदी की भावनात्मक अभिव्यक्ति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने खुद को मोदी के दोस्त बताने पर कहा है -
- ''मोदी की अपनी पार्टी के लोगों से मित्रता नहीं है, तो वे हमसे क्या दोस्ती करेंगे''
- ''जिन्होंने आडवाणी को खाना नहीं खिलाया, वे हमें क्या खिलाएंगे।''
इलैक्ट्रॉनिक मीडिया में 'लहर' पैदा करना अब भाजपा को ही सवालों के घेरे में ले जा रहा है। ये तीन सवाल बार बार खड़े हो रहे हैं-
क्या दूरदर्शन ने इंटरव्यू को संपादित किया यदि हां तो क्यो?
कहा जा रहा है कि मोदी ने डीडी केे इंटरव्यू में न सिर्फ प्रियंका गांधी पर नरमी दिखाई साथ ही सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल को भी अपना जिगरी बता गए। हालांकि भाजपा के भीतर से सुगबुगाहट है कि मोदी ने सामान्य नागरिक के तौर पर प्रेम की यह परिभाषाएं जताईं हैं। सरकारी प्रसारण माध्यम ने किसके कहने पर मोदी के इंटरव्यू के कुछ अंश छिपाए, यह सवालों के घेरे में है। हालांकि पुष्टि नहीं हो पाई है कि संपादन किया गया है।
क्या पत्रकारों को प्रियंका से राजनैतिक कैंपेन के वक्त् यह सवाल करना चाहिए थ?
यहां एक वर्ग का यह भी मानना है कि प्रियंका यदि राजनैतिक कैंपेन कर रही हैं, तो उनसे सामान्य व भावनात्मक सवाल पूछने पर राजनैतिक जवाब ही मिलेगा। जिस वक्त प्रियंका मोदी पर जुबानी प्रहार कर रहीं थीं, उसी वक्त पत्रकारों के 'बेटी' वाले सवाल पर उन्होंने नकारात्म्क प्रतिक्रिया दी व आगे बेढ़ गईं। इसी मामले पर एक राज उभर कर सामने आया कि मोदी के इंटरव्यू में सार्वजनिक तौर पर 'बेटी' मानने का भावनात्मक बयान नहीं था, फिर कैसे पूछा गया।
क्या केंद्र सरकार मोदी की छवि धूमिल करने के लिए अपने प्रसारण माध्यम का उपयोग कर रही ह?
प्रियंका के साथ ही मोदी ने कांग्रेसी नेता अहमद पटेल पर भी नर्मी दिखाई। सवाल उठ रहे हैं कि मोदी का भावनात्मक दांव कांग्रेस को रास नहीं आया और उसने इंटरव्यू के अंश संपादित करवा दिए। इन्हीं सवाल-जवाबों के फेर में अब राजनैतिक हवा ज्यादा तीखी हो गई है। अब तक जो राजनीति मोदी-राहुल तक सिमट गई थी, अब सरकारी मीडिया की साख तक पहुंच गई है।
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हालांकि दोनों दलों का मानना है कि मीडिया से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। संपादन पत्रकारिता का अंश है। सवाल इस बात पर खड़ा होता है कि क्या संपादन किसी के दबाव में या राजनैतिक व निजी लाभ के लिए किया गया है।
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