अपनी बदहाली पर रोता हरिय़ाणा महिला आयोग

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। अपनी बदहाली और बेबसी पर आंसू बहा रहा है हरिय़ाणा का महिला आयोग। लगता है इसे देखने वाला कोई नहीं है। इसे वर्ष 1998 में गठित किया गया था। महिला आयोग तब से ही किराये के भवन में चल रहा है। कई बार तो बिजली के बिल तक भरने में दिक्कत आती है। सरकार की ओर से जो पांच लाख रुपये मासिक दिए जाते हैं, उनमें से तीन लाख रुपये तो आयोग की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के मानदेय और गाड़ी आदि पर खर्च हो जाते हैं।

Haryana women commission is in dire straits

पीए तक नहीं

इतना ही नहीं, महिला आयोग की अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के पास अपने पीए तक नहीं हैं। दो सहायक अधीक्षक हैं, वे भी महिला एवं बाल कल्याण विभाग से डेपुटेशन पर हैं जबकि 7 अन्य कर्मचारी आउटसोर्स से नियुक्त किए हुए हैं।

यूं चलता काम

यकीन मानिए आयोग का काम आऊटसोर्सिंग नीति के तहत रखे गए स्टॉफ से चल रहा है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने एक सुपरिटेंडेंट डेपुटेशन पर यहां नियुक्त किया था लेकिन अब उसे भी यहां से शिफ्ट कर दिया गया है। सलाहकार का पद भी रिक्त पड़ा है।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग के दो सहायक अधीक्षक ही नियुक्त स्टॉफ के रूप में काम कर रहे हैं। दो टाइपिस्ट-कम-क्लर्क, 3 सेवादार, 1 सफाई कर्मचारी व एक चौकीदार आऊटसोर्स के तहत यहां पर काम कर रहेहै।

अलग से बजट नहीं

यही नहीं, महिला आयोग के लिए अलग से कोई बजट नहीं है। सरकार की ओर से तीन महीने में पंद्रह लाख रुपये यानी हर महीने खर्चों के लिए पांच लाख रुपये दिए जाते हैं। सालाना अगर देखें तो महिला आयोग साठ लाख रुपये में चल रहा है पंचकुला में।

जानकारों का कहना है कि 5 लाख रुपये में सामान्य के खर्चे भी पूरे नहीं होते। ऐसे में आयोग ने पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किराया तक नहीं दिया है। कई बार तो बिजली के बिल तक भरने में दिक्कत आती है। सरकार की ओर से जो पांच लाख रुपये मासिक दिए जाते हैं, उनमें से तीन लाख रुपये तो आयोग की अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के मानदेय और गाड़ी आदि पर खर्च हो जाते हैं।

जानकारों ने बताया कि पहले आयोग को अपना भवन दिए जाने और अलग से बजट का प्रावधान किए जाने की मांग की गई लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। एक बड़े से कमरे में ही पार्टिशन करके आयोग की अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के लिए केबिन बनाए गए हैं। बाकी की जगह स्टॉफ के बैठने के लिए है।

कब सुधरेंगे हालात

हरिय़ाणा की वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र कौर ने कहा कि प्रदेश का महिला आयोग बेहद गैर-जिम्मेदराना तरीके से चल रहा है। इसकी हालत सुधारने का किसी के पास वक्त नहीं है। उम्मीद है हरिय़ाणा की नई मनोहर लाल खट्टर सरकार इस तरफ ध्यान देगी।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+