हरियाणा में दारू पिलाकर वोट पाना मुश्किल हुआ
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला)। हरियाणा बदनाम रहा है चुनावों के समय नेताओं की तरफ से वोट लेने के लिए मतदाताओं को दारू देने से लेकर पिलाने के लिए। पर इस बार नेताओं की मंसूबों पर पानी फिरने वाला है। चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि धन बल व मदिरा के प्रयोग को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे । इस संदर्भ में गठित उड़नदस्ते इस प्रयोग पर कड़ी नजर रखेंगे। मतदाताओं के प्रलोभन के लिए धन, मदिरा या अन्य किसी मद का ऐसा वितरण रिश्वतखोरी है और भारतीय दंड संहिता के अधीन दंडनीय है।

दारू का बढ़ता असर
जानकारों ने बताया कि निर्वाचन आयोग को पिछले चुनावों की प्रक्रिया के दौरान यह बात संज्ञान में आई है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए धन, मदिरा और विविध प्रयोजनीय मदों का गुप्त तरीकों से प्रयोग किया जा रहा है।
इस पर अंकुश लगाने व नजर रखने के लिए आयोग के दिशा-निर्देशानुसार उड़नदस्तों का गठन किया गया है। खर्च पर्यवेक्षक व सहायक खर्च पर्यवेक्षक इस बात पर भी विशेष नजर रखेंगे कि किसी भी मदिरा के विक्रेता की बिक्री चुनाव के दिनों में उसकी नियमित बिक्री से 30 प्रतिशत अधिक हुई है, तो उस पर नजर रखने की जरूरत होगी।
इसके अतिरिक्त रेलवे स्टेशनों, होटलों, फार्म हाउसों, वित्तीय दलालों व हवाला एजेंटों के माध्यम से धन की आवाजाही पर दृष्टि रखने के लिए आयकर विभाग के अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।












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