'अले-लेले मुन्ना' राहुल गांधी के भाषण पर रवि किशन के बयान का हंसल मेहता ने उड़ाया मजाक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने काफी तीखा भाषण दिया, जिसके बाद जमकर हंगामा हो रहा है। राहुल गांधी ने सत्ताधारी दल पर आरोप लगाया कि वह देश के लोगों को आपस में बांटने का काम कर रही है। लोगों को धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है।

राहुल गांधी के भाषण पर भाजपा सांसद रवि किशन ने सोशल मीडिया जोरदार हमला बोला है। रवि किशन ने एक लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखकर भगवान शंकर के रूप का विस्तृत वर्णन करते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला।

ravi kishan

राहुल का बयान 100 करोड़ हिंदुओं का अपमान

रवि किशन ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा होनी थी, लेकिन वो आ गए पूरे 100 करोड़ हिंदुओं पर। मैं शिवजी का बड़ा भक्त हूं, जिस तरह से राहुल शिवजी की तस्वीर को उठा रहे थे, दिखा रहे थे, वह दुखद था।

राहुल के भाषण में अपरिपक्वता थी, उनके भाषण में गंभीरता नहीं थी, वह एक मजाक था, वह भाषण नहीं दे रहे थे, उनमे पीड़ा नजर नहीं आ रही थी। उनके हर शब्द में हथियार नजर आ रहा था। जिस तरह से शिवजी की तस्वीर के साथ वह खेल खेल रहे थे, वह दुखद है।

मैं शिवभक्त हूं, इस तरह से उनका बयान दुखद है। राहुल गांधी के भाषण में अहम और घमंड की झलक दी रही थी, उन्होंने संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उनका भाषण पूरे देश के विश्वक के सनातनियों पर आघात था।

हंसल मेहता ने उड़ाया मजाक

रवि किशन के बयान का मजाक उड़ाते हुए फिल्म निर्माता हंसल मेहता ने प्रतिक्रिया दी है। रवि किशन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अले-लेले मुन्ना। गौर करने वाली बात है कि हंसल मेहता सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी राजनीतिक विचारधारा को रखने के लिए जाने जाते हैं।

रवि किशन ने लिखी लंबी पोस्ट

इससे पहले रवि किशन ने सोशल मीडिया पर एक लंबी चौड़ी पोस्ट लिखकर खुद को प्राउड हिंदू कहा था। उन्होंने लिखा, शंकर का वह क्रोधानल कर सकता जगती क्षार-क्षार.डमरू की वह प्रलय-ध्वनि हूं जिसमें नचता भीषण संहार.रणचण्डी की अतृप्त प्यास।

मैं दुर्गा का उन्मत्त हास.मैं यम की प्रलयंकर पुकार, जलते मरघट का धुआंधार.फिर अन्तरतम की ज्वाला से, जगती में आग लगा दूं मैं.यदि धधक उठे जल, थल, अम्बर, जड़, चेतन तो कैसा विस्मय?हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं आदि पुरुष, निर्भयता का वरदान लिए आया भू पर.पय पीकर सब मरते आए, मैं अमर हुआ लो विष पी कर.अधरों की प्यास बुझाई है, पी कर मैंने वह आग प्रखर.हो जाती दुनिया भस्मसात्, जिसको पल भर में ही छूकर.भय से व्याकुल फिर दुनिया ने प्रारंभ किया मेरा पूजन.मैं नर, नारायण, नीलकंठ बन गया न इस में कुछ संशय.हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं अखिल विश्व का गुरु महान्, देता विद्या का अमरदान.मैंने दिखलाया मुक्ति-मार्ग, मैंने सिखलाया ब्रह्मज्ञान.मेरे वेदों का ज्ञान अमर, मेरे वेदों की ज्योति प्रखर.मानव के मन का अंधकार, क्या कभी सामने सका ठहर?मेरा स्वर नभ में घहर-घहर, सागर के जल में छहर-छहर.इस कोने से उस कोने तक, कर सकता जगती सौरभमय.हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं तेज पुंज, तमलीन जगत में फैलाया मैंने प्रकाश.जगती का रच करके विनाश, कब चाहा है निज का विकास?शरणागत की रक्षा की है, मैंने अपना जीवन दे कर.विश्वास नहीं यदि आता तो साक्षी है यह इतिहास अमर.यदि आज देहली के खण्डहर, सदियों की निद्रा से जगकर.गुंजार उठे उंचे स्वर से 'हिन्दू की जय' तो क्या विस्मय?हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

दुनिया के वीराने पथ पर जब-जब नर ने खाई ठोकर.दो आंसू शेष बचा पाया जब-जब मानव सब कुछ खोकर.मैं आया तभी द्रवित हो कर, मैं आया ज्ञानदीप ले कर.भूला-भटका मानव पथ पर चल निकला सोते से जग कर.पथ के आवर्तों से थक कर, जो बैठ गया आधे पथ पर.उस नर को राह दिखाना ही मेरा सदैव का दृढ़ निश्चय.हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैंने छाती का लहू पिला पाले विदेश के क्षुधित लाल.मुझ को मानव में भेद नहीं, मेरा अंतस्थल वर विशाल.जग के ठुकराए लोगों को, लो मेरे घर का खुला द्वार.अपना सब कुछ लुटा चुका, फिर भी अक्षय है धनागार.मेरा हीरा पाकर ज्योतित परकीयों का वह राजमुकुट.यदि इन चरणों पर झुक जाए कल वह किरीट तो क्या विस्मय?हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं वीर पुत्र, मेरी जननी के जगती में जौहर अपार.अकबर के पुत्रों से पूछो, क्या याद उन्हें मीना बाजार?क्या याद उन्हें चित्तौड़ दुर्ग में जलने वाला आग प्रखर?जब हाय सहस्रों माताएं, तिल-तिल जलकर हो गईं अमर.वह बुझने वाली आग नहीं, रग-रग में उसे समाए हूं.यदि कभी अचानक फूट पड़े विप्लव लेकर तो क्या विस्मय?हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

होकर स्वतंत्र मैंने कब चाहा है कर लूं जग को गुलाम?मैंने तो सदा सिखाया करना अपने मन को गुलाम.गोपाल-राम के नामों पर कब मैंने अत्याचार किए?कब दुनिया को हिन्दू करने घर-घर में नरसंहार किए?कब बतलाए काबुल में जा कर कितनी मस्जिद तोड़ीं?भूभाग नहीं, शत-शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय.हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

मैं एक बिंदु, परिपूर्ण सिन्धु है यह मेरा हिन्दू समाज.मेरा-इसका संबंध अमर, मैं व्यक्ति और यह है समाज.इससे मैंने पाया तन-मन, इससे मैंने पाया जीवन.मेरा तो बस कर्तव्य यही, कर दूं सब कुछ इसके अर्पण.मैं तो समाज की थाती हूं, मैं तो समाज का हूं सेवक.मैं तो समष्टि के लिए व्यष्टि का कर सकता बलिदान अभय.हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन, रग-रग हिन्दू मेरा परिचय!

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