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गुवाहाटी हाईकोर्ट से MLA अखिल गोगोई को बड़ा झटका, NIA कोर्ट का आदेश खारिज, तय होंगे आरोप

असम के विधायक अखिल गोगोई के खिलाफ अब आरोप तय करने की अनुमति हाईकोर्ट ने दे दी है। उच्चतम न्यायालय का यह आदेश गोगोई के लिए बड़ा झटका है।

Guwahati High and Akhil Gogoi

असम के विधायक अखिल गोगोई की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध में प्रदर्शन और माओवादियों से संदिग्ध संबंधों को लेकर आरोप तय करने की अनुमति दे दी है। गुवाहाटी उच्च न्यायालय की जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस मलासरी नंदी की खंडपीठ ने मामले को फिर से ओपन करने के बाद आरोप तय करने की अनुमति दी है।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गुरुवार को निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ आरोप तय करने की अनुमति दे दी। इस आदेश के बाद अब निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को CAA विरोधी प्रदर्शनों और माओवादियों से संदिग्ध संबंधों जुड़ा मामला फिर से ओपन हो गया है। हालांकि इससे पहले निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई और उनके तीन सहयोगियों को एनआईए की विशेष अदालत से मिली क्लीनचिट दे दी थी। जिसे उच्चतम न्यायालय ने खारिज कर दिया।

मामले में दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुमन श्याम और जस्टिस मलासरी नंदी की खंडपीठ ने केस को फिर से ओपन करने का आदेश जारी किया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इस मामले की एनआईए कोर्ट दोबारा सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अखिल गोगोई ने बताया की उन्हें और तीन अन्य लोगों को 23 फरवरी को विशेष एनआईए कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया गया है, जिसे वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

क्या है मामला?
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के विरोध के दौरान दिसंबर 2019 में असम में हुई हिंसा का कथित रूप से एमएलए अखिल गोगोई उनके सहयोगियों पर आरोप लगे हैं। मामले में एनआईए कोर्ट ने 1 जुलाई, 2021 को गोगोई और उनके तीन सहयोगियों को ढैज्या कोंवर, बिट्टू सोनोवाल और मानश कोंवर को आरोपी बनाया गया था। एनआईए सीएए विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े गोगोई के दो मामलों की जांच कर रही थी। उनमें से एक में, विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें जमानत दी थी। हालांकि दूसरे मामले में वे न्यायिक हिरासत में थे। इस मामले में उनकी जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

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