Guru Nanak: देश-धर्म को लेकर क्या थे सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी के विचार, पढ़ें 10 अनमोल वचन
Guru Nanak 2023: सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का आज 22 सितंबर को पूरे भारत में शादी की सालगिरह का जश्न मनाया जा रहा है। वहीं पाकिस्तान में 22 सितंबर को गुरु नानक देव जी की पुण्य तिथि मनाई जा रही है। सिखों के नानकशाही कैलेंडर और उसमें संशोधित तारीखों को लेकर ये विवाद की स्तिथि बनी है। गुरु नानक जी ने समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने और समाज को नई दिशा दिखाने काम किया था।
गुरु नानक देव जी, अपने आध्यात्मिक विश्वासों, राजनीतिक, सामाजिक ज्ञान के लिए जाने जाते थे। गुरु नानक देव ने सभी के लिए समानता' का संदेश दिया है। गुरु नानक देव जी ने "इक ओंकार''(शाश्वत सत्य) का संदेश साझा करते हुए पूरे एशिया में बड़े पैमाने पर यात्रा की और लोगों को धर्म का ज्ञान दिया।

गुरु नानक देव जी ने 15वीं शताब्दी में 'सिख धर्म' की नींव रखी थी। गुरु नानक की शिक्षाओं को सिख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में लिखा गया है। गुरु ग्रंथ साहिब में मुख्य रूप से तीन शिक्षाएं दी गई हैं, नाम जपना, दूसरों और जरूरतमंद लोगों की मदद करना और किसी का भी शोषण और बिना किसी धोखाधड़ी के ईमानदारी से जीवन जीना।
गुरु नानक देव जी का कहना था कि ईश्वर शाश्वत सत्य है। उनकी कही बातें आज के वक्त में भी प्रासंगिक है। उनके अनमोल विचार आज भी लोगों को जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं।
आइए पढ़ें गुरु नानक देव जी के 10 अनमोल विचार...?
- 1. इस जग को जीतने के लिए अपनी कमियों और विकारों पर विजय पाना बहुत जरूरी है।
- 2. केवल वही बोले, जो आपको मान-सम्मान दिलाए।
- 3. जो इंसान कड़ी-मेहनत करके कमाता है, और अपनी मेहनत की कमाई में से थोड़ासा भी दान करता है, वह सत्य मार्ग ढूंढ लेता है।
- 4. सभी मनुष्य एक ही हैं, ना कोई बड़ा और ना कोई छोटा है। नो कोई गरीब है और ना कोई अमीर है।
- 5. जिस व्यक्ति को खुद पर विश्वास नहीं है वो कभी भी ईश्वर पर पूर्ण-रूप से विश्वास नहीं कर सकता।
- 6. अहंकार से ही मानवता का अंत होता है। अहंकार कभी नहीं करना चाहिए, बल्कि हृदय में सेवा भाव रख जीवन बिताना चाहिए।
- 7. हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहो...क्योंकि जब आप किसी की मदद करते हैं, तो ईश्वर आपकी मदद करता है।
- 8. स्त्री जाति का आदर करना चाहिए। सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं।
- 9. गुरु की आवाज भगवान की आवाज है। वही ज्ञान और निर्वाण का सच्चा स्त्रोत है। बिन गुरु, ज्ञान नहीं मिल सकता है।
- 10. अहंकार, ईर्ष्या, लालच, लोभ मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देते। ऐसे में इनसे दूर रहना चाहिए।












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