Gujarat: बीजेपी के गढ़ में सेंध, सूरत नगर निगम में AAP की जीत के क्या हैं मायने ?

गांधीनगर। गुजरात के छह नगर निगमों के लिए हुए चुनाव के परिणाम जैसे-जैसे साफ होते जा रहे हैं वैसे-वैसे ही भाजपा समर्थकों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। हो भी क्यों न भाजपा का गढ़ और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह प्रदेश और लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यक्षेत्र होने के नाते यहां के परिणाम भाजपा के लिए बहुत मायने रखते हैं। जब पार्टी छह के छह नगर निगम में जीत की तरफ बढ़ रही हो, चार में जीत चुकी है, तो इस जीत का जश्न और ही बढ़ जाता है। लेकिन भाजपा के साथ जिस दूसरी पार्टी में गुजरात नगर निगम चुनाव के नतीजों को लेकर जश्न और उत्साह का माहौल है वह अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी है।

बीजेपी के गढ़ में आप ने लगाई सेंध

बीजेपी के गढ़ में आप ने लगाई सेंध

गुजरात नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने सूरत में जीत दर्ज करते हुए अपना खाता खोला है। सूरत को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है। आप ने यहां से आठ सीटों पर अभी तक जीत हासिल की है। इनमें वार्ड नंबर 4 और वार्ड नंबर 16 की चार-चार सीट शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी 10 सीटों पर आगे चल रही है।

गुजरात में अपने पैर जमाने के लिए पूरे दमखम से जुटी आम आदमी पार्टी के लिए यह जीत इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि अभी तक सूरत में कांग्रेस ने अपना खाता भी नहीं खोला है जबकि कांग्रेस गुजरात में मुख्य विपक्षी दल है। एक तरह से दिल्ली और पंजाब के बाद आम आदमी पार्टी के गुजरात में भी वोट बैंक बनाने के साफ संकेत हैं।

अब जब जीत इस तरह से हो पार्टी में उत्साह तो नजर ही आएगी। आम आदमी पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है "आप ने बीजेपी का गढ़ भेद दिया.. अभी तक सूरत की 8 सीटों पर जीत दर्ज। वार्ड नम्बर की 4 सीट, वार्ड नम्बर 16 की 4 सीट।"

ट्वीट में आगे लिखा गया है कि "गुजरात में कई अन्य जगहों पर भी पार्टी लीड कर रही है। केजरीवाल का दिल्ली मॉडल गुजरात के लोगों को उम्मीद दिखा रहा है।" पार्टी के गुजरात हैंडल से भी जीत पर प्रत्याशियों को बधाई दी है।

केजरीवाल के लिए अच्छा संकेत

केजरीवाल के लिए अच्छा संकेत

राष्ट्रीय राजनीति में पैर जमाने की कोशिश कर रहे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए गुजरात नगर निगम चुनाव के नतीजे एक अच्छा संकेत हैं। इसके पहले गोवा और कश्मीर ने निकाय चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को सफलता मिली थी। आप के प्रत्याशी हेंजेल फर्नांडीस ने गोवा पंचायत चुनाव में सीट पर जीत दर्ज की थी। कश्मीर में आप नेता मेहराज मलिक ने डीडीसी चुनाव में डोडा के कहरा सीट पर जीत हासिल की। हालांकि मेहराज ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।

नरेंद्र मोदी का गृह प्रदेश होने के चलते इस समय गुजरात का राष्ट्रीय राजनीति में अपना ही महत्व है। ये बात अरविंद केजरीवाल भी समझते हैं। यही वजह है आम आदमी पार्टी लंबे समय से गुजरात में खुद को मजबूत करने की तैयारी में लगी है। ये पहली बार है जब आप ने गुजरात के निकाय चुनाव में सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। पार्टी ने न सिर्फ उम्मीदवार मैदान में उतारे बल्कि जीत के लिए प्रमुख नेताओं को राज्य में प्रचार के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई। गुजरात में पार्टी की रणनीति की कमान आप नेता आतिशी के हाथ में थी।

भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल

भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल

शहरी क्षेत्र के पढ़े लिखे मतदाताओं में अपनी पहचान बनाने वाली आम आदमी पार्टी के लिए ये नतीजे खुशी की बात तो है इसके साथ ही यह भाजपा के लिए चिंता का विषय भी बन सकता है। नगर निगम चुनाव में कुछ सीटों पर जीत के आधार पर विधानसभा चुनावों के लिए भविष्यवाणी करना तो कुछ ज्यादा होगा लेकिन पार्टी ने सूरत जैसे गढ़ में अपना खाता खोलकर ये संकेत कर दिया है कि अगले विधानसभा चुनाव में वह अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा ही सकती है।

भाजपा के साथ ही यह कांग्रेस के लिए भी चिंता की बात है। नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जिस सूरत में सफलता हासिल की है वहां पर कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई। गुजरात में मुख्य विपक्षी दल के रूप में मौजूद कांग्रेस के रहते उसकी जगह कोई और भाजपा को टक्कर दे रहा है तो ये भाजपा से ज्यादा कांग्रेस के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।

आप ने घोषणा कर रखी है कि वह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश और गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से लड़ेगी।

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