कोरोना को लेकर गुजरात सरकार को फटकार लगाने वाली हाईकोर्ट बेंच को बदला गया
नई दिल्ली। गुजरात में कोरोना संकट और प्रवासी मजदूरों को लेकर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही बेंच में फेरबदल किया गया है। गुजरात हाईकोर्ट में रोस्टर में बदलाव के बाद अब एक नई बेंच इस पर सुनवाई करेगी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति इलेश जे वोरा की बेंच कर रही थी। जस्टिस जे वोरा को हटा दिया गया है। गुरुवार को नई बेंच का गठन किया गया, जिसमें जस्टिस वोरा की जगह अध्यक्षता चीफ जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे हैं। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला नई पीठ में बने रहेंगे।
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जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस वोरा की बेंच ने 22 मई को सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। बेंच ने कोरोना संकट के समय अहमदाबाद सिविल अस्पताल की स्थिति को काल कोठरी से बदतर करार दिया था। अदालत ने कहा था कि यह बहुत ही परेशान करने वाला और दुखद है कि आज की स्थिति में अहमदाबाद के सिविल अस्पताल की स्थिति बहुत ही दयनीय है। 25 मई की सुनवाई में गुजरात सरकार को क्लीनचिट देने से इनकार करते हुए जजों ने खुद अस्पतालों का दौरा करने को भी कहा था।
अदालत ने बीजेपी की विजय रुपाणी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तुलना डूबते टाइटनिक जहाज से की थी। कहा था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और इलेश जे. वोरा की पीठ ने कोरोना महामारी को लेकर राज्य सरकार को सही ढंग और जिम्मेदार होकर कार्य करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। अदालत ने प्रवासी मजदूरों, गरीब मरीजों की देखभाल, अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी, डॉक्टरों और दूसरे हेल्थ वर्कर्स के लिए सुरक्षा की व्यवस्था पर सरकार को लताड़ा था।
11 मई को जस्टिस जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति इलेश जे वोरा की बेंच ने गुजरात में प्रवासियों के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया और COVID-19 नियंत्रण से संबंधित मामलों के साथ इसे क्लब किया था। यह पीठ तब से इस पर सुनवाई कर रही थी, जब इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की गई थी।












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