सरकार मंदिरों से लेगी सोना, देगी मोटा ब्याज
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) केन्द्र सरकार जल्दी ही एक योजना लेकर आ रही है,जिससे कि देश के प्रमुख मंदिर अपने यहां का सोना सरकार के पास डिपाजिट रख सकेंगे। उन्हें बदले में मिलेगा मोटा ब्याज। उस ब्याज का इस्तेमाल ये मंदिर कर सकेंगे अपने मैनजमेंट और दूसरे सामाजिक-धार्मिक कामों के लिए।

सरकार इस लिहाज से मुंबई के सिद्दिविनायक मंदिर, केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर वगैरह पर नजर रख रही है। इन सभी मंदिरों के पास अकूत सोना है। ये सोना इन मंदिरों को चढ़ावे के रूप में मिलता रहा है भक्तों से।
सोने की सुरक्षा
ये सभी मंदिर अपने सोने की सुरक्षा के लिए हर साल मोटा धन खर्च करते हैं। सरकार का मानना है कि अगर मंदिर सोना उसके पास रखवा देंगे तो उनके सामने इसकी सुरक्षा का भी सवाल सामने नहीं आएगा।
खरबों का सोना
सूत्रों का कहना है कि मंदिरों के पास खरबों रुपये का सोना है। सोने का कोई इस्तेमाल भी नहीं हो रहा। सरकार की योजना के साथ आने वाले मंदिर मैनेजमेंट को हर साल करोड़ों रुपये का ब्याज मिलने लगेगा। जिससे ये अपने क्षेत्र में स्कूल,कालेज और दूसरे जरूरी काम करवा बेहतर तरीके से कर सकेंगे।
सोने को पिघलाया जाएगा
सूत्रों ने बताया कि सरकार का इरादा है कि वह मंदिरों से लिए सोने को पिघला कर ज्यूलर्स को देगी। ताकि वे उसे बेच सके। कारण ये है कि भारत हर साल बहुत बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है। इसके चलते भारत की विदेश मुद्रा का खजाना कमजोर पड़ता है। सरकार के उक्त कदम से सोने का इंपोर्ट घटेगा।
सोने का इंपोर्ट
अगर मंदिर भी सरकार के साथ चलेंगे तो भारत का गोल्ड का आयात घटेगा। अभी भारत करीब 800 टन सोने का हर साल आयात करता है। अगर बात केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की करें तो इसे भारत का सबसे धनी मंदिर माना जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के 108 पवित्र स्थलों में से एक है।
इस मंदिर के 5 तहखाने कुछ समय पहले खोले गए थे। जिसमें भारी मात्रा में सोने-चांदी के सिक्के, कीमती पत्थर और जेवरात मिले हैं। इस मंदिर की कुल चल-अचल संपत्ति एक लाख करोड़ रुपये मानी जाती है। इसी तरह से महाराष्ट्र का शिरडी साईबाबा मंदिर आमदनी के मामले में देश के सबसे अहम मंदिरों में शुमार होता है।
इसमें हर साल जमकर कैश, सोना,चांदी का चढ़ावा आता है। सरकार की योजना पर राय देते हुए राजधानी के सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप गुप्ता कहते हैं कि यह बेहद अहम योजना साबित हो सकती है देश के लिए। इसके चलते मंदिर अपने दूसरे तमाम काम बेहतर तरीके से कर सकेंगे।












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