'अब नहीं चलेगी मनमानी', सरकार ने जारी की एग्रीगेटर गाइडलाइंस, जानिए इसके बारे में सब कुछ
Aggregator Guidelines 2025: सुबह की भीड़, ऑफिस की देरी, और ओला-उबर के महंगे किराए-इन सबके बीच अगर कोई विकल्प आपको चुपचाप, तेजी से और सस्ते में मंजिल तक पहुंचा सकता है, तो वह है बाइक टैक्सी। लेकिन अब तक जिस सेवा पर सवालिया निशान लगा हुआ था, वह अब कानूनी हरी झंडी के साथ नई रफ्तार पकड़ने जा रही है।
केंद्र सरकार ने पहली बार निजी (गैर-परिवहन) मोटरसाइकिलों को यात्रियों को लाने-ले जाने की अनुमति देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। यह सुविधा एग्रीगेटर्स-जैसे Rapido और Uber-के माध्यम से दी जाएगी, हालांकि अंतिम फैसला राज्यों के हाथ में होगा।

'मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश 2025' के ज़रिए सरकार ने साझा मोबिलिटी की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत कर दी है, जिससे देशभर के लाखों युवाओं को न सिर्फ रोजगार मिलेगा, बल्कि शहरों की सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी।
राज्य सरकारों को मिलेगा निर्णय का अधिकार
दिशानिर्देश में कहा गया है कि "राज्य सरकारें एग्रीगेटर्स के माध्यम से साझा मोबिलिटी के रूप में यात्रियों की यात्रा के लिए गैर-परिवहन मोटरसाइकिलों के एकत्रीकरण (aggregation) की अनुमति दे सकती हैं। इससे न केवल ट्रैफिक जाम और वाहन प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि सस्ती यात्री सुविधा, हाइपरलोकल डिलीवरी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।"मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकारें मोटर वाहन अधिनियम की धारा 67(3) के तहत एग्रीगेटर्स को ऐसे निजी दोपहिया वाहनों से सवारी कराने की अनुमति देने के लिए दैनिक, साप्ताहिक या पखवाड़े के आधार पर शुल्क निर्धारित कर सकती हैं।
रैपिडो और उबर जैसी कंपनियों को मिली राहत
इस निर्णय से रैपिडो, उबर और अन्य बाइक टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों को कानूनी स्पष्टता और राहत मिली है। अब तक ये सेवाएं कई राज्यों में कानूनी अस्पष्टता या प्रतिबंध के कारण संकट में थीं। उदाहरण के तौर पर, कर्नाटक सरकार द्वारा बाइक टैक्सियों पर लगाए गए प्रतिबंध से इन कंपनियों को भारी झटका लगा था और विरोध प्रदर्शन हुए थे। अब केंद्र सरकार के इस निर्णय से राज्य सरकारों के पास विकल्प होगा कि वे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार बाइक टैक्सी सेवाओं की अनुमति दें या नहीं।
उद्योग जगत के लोगों ने फैसले का स्वागत किया
उद्योग जगत के प्रमुख खिलाड़ियों, जैसे उबर और रैपिडो, ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे भारत में साझा यातायात सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा, सस्ती यात्रा सुविधाओं का विस्तार, और नए रोजगार सृजन के रास्ते खुलेंगे। रैपिडो के स्पोक्सपर्सन ने कहा, "यह निर्णय न केवल हमारे लिए बल्कि लाखों उन युवाओं के लिए अवसर लेकर आएगा जो बाइक टैक्सी सेवाओं के माध्यम से आजीविका अर्जित कर रहे हैं।"
केंद्र सरकार का यह निर्णय न केवल नवाचार और रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के शहरी इलाकों में यातायात और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए साझा यातायात के बढ़ते विकल्पों को कानूनी मान्यता देता है। अब बारी राज्य सरकारों की है कि वे इस अवसर का कितना लाभ उठाती हैं।












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