बीजेपी को हराकर अखिलेश-माया ने राहुल के लिए खड़ी कर दी ये मुसीबत

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के परिणाम बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के लिए खुशखबरी लाई है। बसपा और सपा का गठबंधन इस चुनाव में फिलहाल रंग ले आया है। इस गठबंधन को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे और कई पुरानी बातों को उधेड़ा जा रहा था। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी यह गठबंधन रहेगा या नहीं लेकिन इन चुनाव परिणामों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए राहत भरी खबर नहीं है। कांग्रेस गोरखपुर और फूलपुर सीट पर कुछ हजार वोटों तक ही सिमट गई। इतना ही नहीं बसपा और सपा गठबंधन के इस उपचुनाव के टेस्ट में पास होने के बाद कांग्रेस के लिए समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल साल 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी की पहल पर सपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था लेकिन वो सफल नहीं हुआ था।

क्या अब भी सपा और कांग्रेस की दोस्ती बरकरार रहेगी?
इस उपचुनाव में बसपा संग सपा का गठबंधन कामयाब रहा। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिर क्या अब भी सपा और कांग्रेस की दोस्ती बरकरार रहेगी? कांग्रेस ने दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। फूलपुर से कांग्रेस ने मनीष मिश्रा पर दांव लगाया था वहीं गोरखपुर से पार्टी ने सुरहिता चैटर्जी को मौका दिया था।

कांग्रेस कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी
यूपी में सपा और बसपा के साथ आ जाने से कांग्रेस की कोई प्रासंगिकता नहीं रह जाएगी। पार्टी ने पहले ही अपना जनाधार खो दिया है। गौरतलब है कि साल 2012 के चुनाव में कांग्रेस को यूपी में जहां 29 सीटें मिली थीं, वो 2017 के चुनाव में 9 पर सिमट गईं। आज आए परिणामों में कांग्रेस कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है।

आखिर कांग्रेस का यूपी में क्या होगा?
गोरखपुर में कांग्रेस को 13 हजार से ज्यादा वोट मिले वहीं फूलपूर जहां से कभी पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद रहा करते थे,वहां से कांग्रेस को 7 से 8 हजार के बीच वोट मिले हैं। कांग्रेस हाईकमान इस बात के लेकर चिंतन मनन करना होगा कि आखिर उसका यूपी में क्या होगा? एक ओर जनाधार खिसक रहा है तो दूसरी ओर मौजूदा परिणामों को देखते हुए अखिलेश भी कांग्रेस से दूरी बना सकते हैं।












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