Goa Ponda By-Election Cancel: क्यों कैंसिल हुआ पोंडा उपचुनाव? CM बोले EC पहले ही फैसला ले लेता तो बेहतर होता
Goa Ponda by-Election cancel: गोवा की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पोंडा विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया पर रोक लगाकर इतिहास रच दिया है। यह पहली बार है जब किसी चुनाव को अदालत के आदेश पर बीच में ही रद्द किया गया है, वो भी मतदान से ठीक पहले, जिससे यह मामला अभूतपूर्व बन गया है।
सीएम बोले- चुनाव आयोग फैसला ले लेता तो बेहतर होता?
पोंडा उपचुनाव रद्द होने पर गोवा के सीएम प्रमोद सावंत ने कहा, "हमारा चुनाव रद्द कर दिया गया है। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह हमारे लिए भी झटका और चौंकाने वाली खबर है।अगर चुनाव आयोग पहले ही फैसला ले लेता तो बेहतर होता।

क्यों कैसिंल किया गया पोंडा उपचुनाव?
मामला चुनाव आयोग की उस अधिसूचना से जुड़ा है, जिसके तहत पोंडा सीट पर उपचुनाव कराया जाना था। अदालत ने इस अधिसूचना को "मनमाना" बताते हुए कहा कि यह कानून के प्रावधानों के खिलाफ है, इसलिए इस पर रोक लगाना जरूरी है।
कानून की किस धारा पर टिकी बहस
कोर्ट ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 151A(a) का हवाला दिया। इस प्रावधान के अनुसार, अगर किसी सीट पर विधायक का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम हो, तो वहां उपचुनाव कराना अनिवार्य नहीं होता। अदालत ने माना कि इस मामले में यही नियम लागू होता है।
कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने पाया कि संभावित परिणाम तिथि 4 मई 2026 से लेकर 14 मार्च 2027 तक विधानसभा का कार्यकाल केवल लगभग 9 महीने बचता है। ऐसे में नया विधायक न्यूनतम एक साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगा, जो इस प्रावधान का उल्लंघन है। इसी आधार पर कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
चुनाव आयोग की कोर्ट ने दलील की खारिज
चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, डाक मतपत्र डाले जा चुके हैं और पूरी मशीनरी तैयार है। साथ ही आयोग ने "शेष कार्यकाल" की अलग व्याख्या पेश की, लेकिन अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कानून की व्याख्या स्पष्ट है और इसमें कोई भ्रम नहीं है।
किसकी अपील पर पोंडा उपचुनाव हुआ कैंसिल?
इस उपचुनाव को सामाजिक कार्यकर्ता प्रीतम हरमलकर और अधिवक्ता अंकिता कामत ने चुनौती दी थी। उनका कहना था कि यह चुनाव कानून के खिलाफ है क्योंकि चुना गया विधायक पर्याप्त कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगा।
क्यों अहम है कोर्ट का यह फैसला
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर पहले के फैसले एक जैसे हैं, इसलिए मामले को बड़ी पीठ को भेजने की जरूरत नहीं है। यह फैसला न सिर्फ गोवा बल्कि पूरे देश के चुनावी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।












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