जब खलने लगी लड़कियों की कमी तो तोड़ दी 650 साल पुरानी परंपरा

करीब 650 साल पुरानी परम्परा को बदलते हुए सतरोल खाप के मौजिज लोगों ने यह एतिहासिक फैसला लेने से पहले सतरोल खाप के अनेक मौजिज लोगों के सामने अपनी राय रखी. सबसे पहले खाप के प्रधान इन्द्र सिंह ने कहा कि हम सतरोल खाप को तोड़ नहीं रहे हैं सिर्फ रिश्ते नातों के बंधन को खोल रहे हैं. प्रधान ने कहा कि भाईचारा सुख दुख के लिए बनाया गया है और हमें इस पर कायम रहना चाहिए. गांव स्तर पर कमेटी का गठन करना चाहिए. रिश्ते नाते होने से भाईचारा कमजोर नहीं, बल्कि ओर भी मजबूत होगा.
सभी लोगों की रायशुमारी करके पांच लोगों की एक कमेटी बनाई गई और निर्णय लिया गया कि आज से सतरोल खाप के लोग आपस में रिश्तेदारी कर सकेंगे. उन्होंने अपना गांव, गोत्र और पड़ोसी गांव को छोड़ना होगा. वहीं सतरोल खाप में कोई जातीय बंधन भी नहीं रहेगा और सतरोल खाप का नारनौंद में एक चबूतरा बनाया जाएगा. इस फैसले को लेकर मौजिज लोगों ने अपनी समहति दी. लेकिन पेटवाड़ तपा के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया और महापंचायत से उठकर चले गए.
इस परम्परा को तोड़ने की सबसे बड़ी वजह बताइ गई कि प्रदेश में लड़कियों की संख्या दिनों-दिन कम होती जा रही है, इसलिए लड़कों की शादियों में दिक्कतें आ रही हैं. दूसरी तरफ इन 42 गांवों में भाईचारा होने के कारण विवाह नहीं हो पाते थे, जिस कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. अब पंचायत ने कुछ शर्तों के साथ ये बंधन तोड़ दिए हैं तो बहुत से लोग इससे खुश नज़र आ रहा है.












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