गुलाम नबी आजाद ने बताया कांग्रेस का 'सबसे खराब' अध्यक्ष कौन? पूर्व प्रधानमंत्री का नाम लिया

गुलाम नबी आजाद ने अपनी आत्मकथा में कांग्रेस पार्टी को लेकर कई खुलासे किए हैं। इसमें एक यह भी दावा है कि पीवी नरसिम्हा राव उनके हिसाब से पार्टी के सबसे खराब अध्यक्ष थे।

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कांग्रेस के पूर्व नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद अपनी आत्मकथा की वजह से अभी सुर्खियों में हैं। हालांकि, उनके मुताबिक उन्होंने इसमें कांग्रेस के सारे राज फाश नहीं किए हैं, फिर भी उनकी पुरानी पार्टी उनसे तिलमिलाई हुई है।

बहरहाल, आजाद ने बताया है कि उनकी नजर में कांग्रेस पार्टी का सबसे 'बेकार अध्यक्ष' कौन हुआ है? आजाद ऐसे दिग्गज कांग्रेसी रहे हैं, जिन्हें जवाहर लालू नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेताओं के अलावा शायद सभी कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों और पार्टी अध्यक्षों के साथ काम करने का मौका मिला है।

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'आजाद' में कांग्रेस की पोल-खोल
जम्मू-कश्मीर से आने वाले देश के दिग्गज नेता और डेमोक्रैटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के प्रमुख और पूर्व कांग्रेसी गुलाम नबी आजाद की आत्मकथा 'आजाद' पार्टी के आंतरिक खुलासों को लेकर इनदिनों खूब चर्चा में है। इसके माध्यम से आजाद ने अंदरूनी सच्चाई को सामने रखने के दावे किए हैं।

इसमें कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर कई अच्छी बातें भी लिखी गई हैं तो कुछ में काला चिट्ठा भी खोलने की कोशिश हुई है। किताब के अंदर की जो बातें अबतक सामने आई हैं, उससे कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं भी शुरू हो चुकी हैं। किताब में एक महत्वपूर्ण बात उन्होंने कांग्रेस के सबसे 'खराब अध्यक्ष' के अनुभव के बारे में भी लिखी है।

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राहुल के कार्य करने के तरीके से संतुष्ट नहीं थे आजाद
दरअसल, गुलाम नबी आजाद इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक की अध्यक्षता में काम कर चुके हैं। कम से कम इस दौरान जितने भी नेता कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं, उनकी अच्छाई और बुराई के बारे में अपना अनुभव सामने रखने का उन्हें पूरा अधिकार भी है।

आजाद ने कांग्रेस छोड़ी है तो उसमें राहुल गांधी के कार्य करने के तरीके का बहुत बड़ा रोल माना जाता है। लेकिन, उनकी नजर में पीवी नरसिम्हा राव एक अच्छे प्रधानमंत्री जरूर थे, लेकिन संगठन को चलाने में वह 'बहुत खराब' थे। इसके लिए उन्होंने 1996 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार का हवाला दिया है।

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'नरसिम्हा राव अच्छे अध्यक्ष नहीं थे'
गुलाम नबी आजाद ने बताया है कि उस चुनाव में हार के बाद कांग्रेस वर्किंग में क्या चर्चा हुई थी। तब पार्टी की कमान पीवी नरसिम्हा राव के पास ही थी। आजाद के मुताबिक उन्होंने राव के सामने ही कह दिया था कि वे अच्छे प्रधानमंत्रियों की गिनती में जरूर हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के लिए 'अच्छे अध्यक्ष नहीं' हैं।

आजाद ने कहा है, 'संगठन से जुड़े कार्यों के लिए न तो आपके पास समय है और न ही रुची ही है। हमारे चुनाव हारने का कारण भी यही रहा।'

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'राव के पक्ष में बोलने वाला कोई नहीं था'
पूर्व कांग्रेसी दिग्गज के अनुसार वर्किंग कमिटी में वह बोलते जा रहे थे और पूर्व कांग्रेसी पीएम उनकी बातों को सुनते जा रहे थे। वैसे भी कई भाषाओं के जानकार राव को एक अच्छा श्रोता माना जाता है। गुलाम नबी ने यह भी दावा किया है कि वर्किंग कमिटी में राव के पक्ष में कोई नहीं बोल रहा था।

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    सोनिया को लिखी चिट्ठी पर भी की बात
    गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस छोड़ी तो उसमें राहुल गांधी से मतभेद को बहुत बड़ा कारण माना जाता है। यह दरार तभी से पैदा हुई थी, जब उनकी अगुवाई में 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिख दी थी।

    आजाद के मुताबिक पार्टी की भलाई के लिए लिखी गई चिट्ठी को गांधी परिवार ने अपने वर्चस्व को चुनौती मान लिया।

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    'कांग्रेस की कमान राहुल के ही हाथ'
    न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक आजाद का अभी भी मानना है कि 'भले ही राहुल के पास कोई पद नहीं हो लेकिन सभी जानते हैं कि 'जहाज (कांग्रेस)के कप्तान वही हैं.......सभी जानते हैं कि फैसले कौन ले रहा है।'

    उनका कहना है कि अगर मल्लिकार्जुन खड़गे चाहें कि सीडब्ल्यूसी की बैठक बेंगलुरु में हो तो कोई नहीं जाएगा। 'इसलिए मैं सिर्फ उन्हें (राहुल को) जहाज को चलाने की शुभकामनाएं दे सकता हूं।'

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