जानिये क्या है नेट न्यूट्रैलिटि, कैसे आपकी इंटरनेट की आजादी खतरे में है

बेंगलुरू(अंकुर सिंह)। पिछले कुछ दिनों से आप नेट न्यूट्रैलिटि के बारे में सुन रहे होंगे, मीडिया से लेकर हर जगह इसकी चर्चा हो रही है। दरअसल इसका सीधा मतलब है कि आप जिस भी इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनी का इस्तेमाल कर रहे हैं वह कंपनी आपकों सभी वेबसाइटों और एप्लिकेशन को बिना किसी रोक-टोक के इस्तेमाल की आजादी देगी।

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एप्स और चुनिंदा वेबसाइटों के लिए चुकाने होंगे अतिरिक्त पैसे

अभी तक आप अपने फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर पर जिस भी वेबसाइट को चाहते थे उसे खोल सकते थे। लेकिन हाल ही में टेलीकॉम कंपनियां अब एक नया नियम लेकर आ रही हैं जिसके अंतर्गत आपको अलग-अलग साइटों को खोलने और एप्स के इस्तेमाल के लिए पैसे चुकाने होंगे।

ऐसे में नेट न्यूट्रैलिटि की पहल इसलिए शुरु की गये है ताकि अगर आप कोई भी वेबसाइट खोले तो उसे आप सामान्य तौर पर जैसे किसी भी वेबसाइट को खोलते हैं खोल सकें।

चुनिंद वेबसाईटें या धीमी खुलेंगी या अतिरिक्त पैसों के बिना नहीं खुलेंगी

मान लीजिए आपने एयरटेल का इंटरनेट कनेक्शन ले रखा है और आप यूट्यूब, फ्लिपकॉर्ट या कोई अन्य वेबसाइट खोल रहे हैं। ऐसे में इन साइटों को खोलने के लिए कंपनी आपसे अतिरिक्त पैसे नहीं मांग सकती या फिर इन साइटों को खुलने में देरी नहीं कर सकती है।

इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर(ISP) आपको सभी वेबसाइटों को खोलने की सामान्य आजादी देगा जैसा कि वर्तमान में मौजूद है। हम बिना किसी अतिरिक्त पैसों के सभी साइटों को एक सामान्य स्पीड के साथ खोल सकते हैं।

क्या है एयरटेल जीरो

एयरटेल जीरो एक माध्यम है जिससे हम मोबाइल के एप्स फ्री में डाउलोड कर सकते हैं। वहीं हमें किसी भी एप को डाउनलोड करने के लिए अलग से पैसे नहीं देने होते हैं, बल्कि हमारे मोबाईल में जो भी डेटा पैक पड़ा है उसी की मदद से हम उस एप को मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।

आपकी टेलीकॉम कंपनी लेगी वेबसाइट्स से अतिरिक्त शुल्क

मान लीजिए आप स्नैपडील एयरटेल से इसके एयरटेल जीरो प्लेटफॉर्म के लिए करार करता है तो आपको स्नैपडील को खोलते समय अपने सर्विस प्रोवाइडर एयरटेल को अतिरिक्त पैसे चुकाने होंगे। दरअसल टेलीकॉम कंपनियां यूट्यूब, स्काइप, फ्लिपकार्ट जैसी साइटों से अतिरिक्त पैसे की मांग करेंगी नये नियम के तहत जिका बोझ उपभोक्ताओं को चुकाना होगा।

विरोध के चलते है ट्राई पर भारी दबाव

ऐसे में अगर भारतीय टेलीकॉम एजेंसियों को यह करने की इजाजत दी जाती है तो यह भारत मे इंटरनेट को तबाह कर सकता है। भारत में इंटरनेट के इस्तेमाल को टेलीकॉम रेगुलेटर अथॉरिटी संभालती है। ट्राई इसकी देखरेख करती है, साथ ही देश में इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए नियम को बनाने का भी काम करती है।

माना जा रहा है कि ट्राई एयरटेल, वोडाफोन सहित कई कंपनियों को इस नियम की इजाजत दे सकती है। इस नये नियम के बाद ये कंपनियां आपको एप्स और वेबसाइटों के इस्तेमाल के लिए अलग से पैसे लेंगी।

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