'देश को अपने विकास का रास्ता खुद बनाना होगा', अडानी ने IIT–ISM के लिए किए दो बड़े ऐलान
Gautam Adani: धनबाद के IIT-ISM के सौ साल पूरे होने पर आयोजित ऐतिहासिक समारोह में ऐसा लगा जैसे समय एक बार फिर राष्ट्रनिर्माण के गहरे दौर में लौट आया हो। मंच पर खड़े गौतम अडानी सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि एक ऐसे नागरिक की तरह नजर आए जो देश की दिशा, ऊर्जा और संसाधनों को लेकर बेहद स्पष्ट सोच रखता है। दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता, टूटते गठजोड़ और बदलते समीकरणों के बीच अडानी ने भारत को एक नई चेतावनी दी कि यह समय हमारी दूसरी आजादी की लड़ाई का है, और इस बार लक्ष्य राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और संसाधन स्वतंत्रता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर भारत अपनी कहानी खुद नहीं लिखेगा, तो दुनिया उसे गलत तरीके से पेश कर देगी। और अगर देश अपनी ऊर्जा, खनिज और संसाधनों को मजबूत नहीं करेगा, तो विकास का अधिकार भी धीरे-धीरे छिन सकता है। इस ऐतिहासिक मंच से अडानी ने न सिर्फ सवाल उठाए, बल्कि युवाओं के लिए दो बड़े अवसरों की घोषणा भी की। जो आने वाले सालों में देश की तकनीक और माइनिंग क्षमता को नई दिशा देंगे।

आधुनिक संप्रभुता के दो स्तंभ
अडानी ने बताया कि आज की दुनिया में असली संप्रभुता दो चीजों पर टिकी है, प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार और ऊर्जा सिस्टम पर नियंत्रण। उन्होंने कहा कि IIT-ISM जैसी संस्थाएं इसी सोच के साथ बनाई गई थीं, क्योंकि कोई भी देश तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक वह धरती के नीचे मौजूद संसाधनों की भाषा को नहीं समझता।
ये भी पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया कोर्ट का बड़ा फैसला: अडानी की कारमाइकल कोयला खदान के गोपनीय डेटा की जांच पर रोक
अडानी ने कहा कि कई विकसित देश, जिन्होंने सालों तक भारी प्रदूषण किया, अब विकासशील देशों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें कैसे बढ़ना चाहिए। भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में है, लेकिन प्रति व्यक्ति बिजली खपत और उत्सर्जन वैश्विक औसत से बहुत कम है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें भारत को गलत तरीके से दिखा देती हैं।
कार्माइकल माइंस: ऊर्जा सुरक्षा की लड़ाई
अपने भाषण में अडानी ने ऑस्ट्रेलिया की कार्माइकल कोयला परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक विरोध के बावजूद यह प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बहुत जरूरी था। यह परियोजना भारत को बेहतर गुणवत्ता वाला कोयला उपलब्ध कराती है, जिससे उद्योग मजबूत होंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि समूह गुजरात के खवड़ा में दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बना रहा है, जो 2030 तक 30 गीगावॉट ग्रीन एनर्जी देगा। इसका एक हिस्सा पहले से ही चालू है।
माइनिंग ही नई अर्थव्यवस्था की नींव
अडानी ने कहा कि माइनिंग को पुराने जमाने का क्षेत्र समझना गलत है। भविष्य की हर नई तकनीक, चाहे इलेक्ट्रिक वाहन हों, एआई सिस्टम हों या डिजिटल इंडस्ट्री-सब कुछ उन धातुओं और खनिजों पर निर्भर है जो जमीन के भीतर से निकलते हैं। उन्होंने कहा, "बिना माइनिंग नई अर्थव्यवस्था संभव ही नहीं है।"
IIT-ISM के लिए दो बड़े एलान
अडानी ने छात्रों और संस्थान के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं-
1. अडानी वार्षिक इंटर्नशिप
- हर साल 50 पेड इंटर्नशिप
- चुने गए छात्रों में से कम से कम 25% को PPO
- फोकस ऐसे छात्रों पर जो नए आइडिया ला सकें और पारंपरिक तरीकों को बदल सकें
2. अडानी 3S माइनिंग एक्सीलेंस सेंटर
- टेक्समिन के साथ मिलकर नया आधुनिक सेंटर
- इसमें मेटावर्स लैब, ड्रोन बेड़ा, सिस्मिक टेक्नोलॉजी और प्रिसिजन माइनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं
- हर साल बड़े स्तर पर हैकथॉन, जिसमें चुने गए आइडिया को फंडिंग और वास्तविक प्रोजेक्ट में बदला जाएगा
"डर मुक्त होकर सपने देखें"
अंत में अडानी ने छात्रों से कहा कि वे भारत की आर्थिक सुरक्षा के प्रहरी बनें। उन्होंने कहा, "आप सिर्फ खनिज नहीं निकाल रहे, आप देश की गरिमा और आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहे हैं।" उन्होंने छात्रों को बड़ा सोचने, नए प्रयोग करने और भारत को एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बनाने की अपील की।
ये भी पढ़ें: Adani university convocation: इंफ्रास्ट्रक्चर से इनोवेशन तक, अडानी विश्वविद्यालय में प्रतिभाओं का दिखा जलवा












Click it and Unblock the Notifications