जाबांज NIA अधिकारी तंजील अहमद की नृशंस हत्या की पूरी कहानी
लखनऊ। देश के गद्दारों और आतंकियों के खिलाफ सीना तानकर खड़े होने वाले एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की जिस तरह से बिजनौर में गोलियों से छलनी कर दिया गया उसने देश के हर नागरिक को बुरी तरह से आहत किया है। तंजील अहमद के परिजनों को अरविंद केजरीवाल ने एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। तंजील अहमद की नृशंस हत्या के पीछे शुरुआती जांच में जो तथ्या सामने आये हैं वह इशारा करता है उनकी हत्या पूरी तरह से योजनाबद्ध तरीके से की गयी है।

पीछा करने के बाद दागी गोलियां
एनआईए अधिकारी की हत्या से पहले कई घंटों तक उनकी रेकी की गयी और उनका पीछा किया गया। दो आदमियों ने बाईक से से उनका पीछा किया और उनके शरीर में 25 गोलियां दागी थीं।
जाबांज NIA अधिकारी तंजील अहमद की हत्या की पूरी कहानी
पत्नी को भी लगी चार गोलियां
तंजील की अस्पताल पहुंचते ही मृत्यु हो गयी और उनकी पत्नी बुरी तरह से घायल हैं उन्हें भी चार गोलिया लगी हैं। हालांकि उनके बच्चे पापा की मदद से खुद को बचाने में सफल हुए हैं। तंजील अहमद बिजनौर में एक पारिवारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
कार्यक्रम में पत्नी ने जाने से किया था मना
इस कार्यक्रम में जाने से पहले तंजील अहमद की पत्नी ने उन्हें जाने से मना किया था लेकिन उन्होंने यह मानने से इनकार कर दिया।
आ रहे थे परेशान करने वाले मैसेज
तंजील के परिवार वालों की मानें तो पिछले दिनों से उनको ऐसे मैसेज मिल रहे थे जिसे पढ़ने के बाद वह परेशान हो जाते थे। जांच एजेंसिया तंजील के मैसेज की भीं जांच कर रही है।
रात 8 बजे से रखी गयी तंजील अहमद पर नजर
तंजील अहमद अपने घर से रात 8 बजे कार्यक्रम में हिस्सा लेने निकले थे। देर रात 12.45 पर वह कार्यक्रम से बाहर निकले और उनके घर पहुंचने से तीन सौ मीटर पहले दो लोगों ने उनपर हमला बोल दिया। दोनों अज्ञात हमलावरों ने तंजील अहमद पर 9एमएम की पिस्तौल से हमला किया था।
बीएसएफ में शामिल हो शुरु की थी देश सेवा
तंजील अहमद ने 1991 में असिस्टैंड कमांडर के पद पर बीएसएफ में तैनात थे जिन्हें डेप्युटेशन पर 2009 में एनआईए में शामिल किया गया था। शुरुआती चरण में वह एनआईए की खुफिया विभाग में थे।
पठानकोट हमले की जांच में भी थे शामिल
इंडियन मुजाहिद्दीन के खिलाफ कई बड़े मामलों की जांच में वह शामिल थे। पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान से आयी साझा जांच दल की टीम से बातचीत करने वालों में भी शामिल थे।
आतंकियों के कोड कर लेते थे आसानी से डीकोड
तंजील अहमद की उर्दू भाषा पर अच्छी पकड़ थी और वह आतंकियों के बीच होने वाली बातचीत के कोड वर्ड को समझने में माहिर थे।












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