तेलगांना के सीएम KCR कल कर सकते हैं विधानसभा भंग करने का ऐलान, लोकसभा चुनाव के साथ नहीं चाहते वोटिंग
नई दिल्ली। तेलंगाना में समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की अटकलें काफी दिन पहले से लगाई जा रही थीं। लेकिन अब खबर है कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव जल्दी ही विधानसभा भंग करने की घोषणा कर सकते हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के एक नेता के मुताबिक चंद्रशेखर राव (केसीआर) रविवार यानी कि कल ही यह घोषणा कर सकते हैं। इसके लिए राव ने कैबिनेट बैठक भी बुलाई है। तेलंगाना में पहली विधानसभा के लिए मई 2014 में चुनाव हुए थे। राव का कार्यकाल मई 2019 में पूरा हो रहा है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि राव लोकसभा चुनाव के साथ राज्य के विधानसभा चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। वे इस साल के अंत में होने वाले 4 राज्यों (मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम ) के विधानसभा चुनाव के साथ ही तेलंगाना में चुनाव कराना चाहते हैं।

टीआरएस के एक नेता की मानें तो पार्टी को यकीन है कि तेलंगाना के लोगों में उसकी साख काफी ज्यादा है, लिहाजा वह पहले ही इसका लाभ उठाना चाहती है। नेता ने हाल में टीआरएस द्वारा राज्य में किए गए एक सर्वे का भी जिक्र किया और बताया कि अगर अगले कुछ महीनों में चुनाव हो जाए तो पार्टी को 117 में से 100 सीटें मिल सकती हैं। समय पूर्व चुनाव करने के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर राव ने कहा कि टीआरएस हमेशा चुनाव के लिए तैयार है। राव ने कहा, 'आमतौर पर सत्ताधारी पार्टी अपना कार्यकाल पूरा करना चाहती है।
कोई नहीं चाहता कि वह समय से पहले हट जाए. ठीक इसी तरह विपक्ष इस चीज के लिए बेसब्र रहता है और मौजूदा सरकार को जल्द से जल्द हटाना चाहता है।' राव ने कहा, 'हालांकि तेलंगाना में यह उल्टा है। यहां टीआरएस चुनाव के लिए तैयार है। विपक्ष यह सवाल पूछ रहा है कि आप चुनाव जल्दी क्यों कराना चाहते हैं? अप्रैल में क्यों नहीं?' तेलंगाना के मौजूदा सियासी हालात पर नजर डालें तो यहां टीआरएस जमीन पर विपक्ष से कोसों आगे है। इसके साथ ही केसीआर अभी भी राज्य में ज्यादा प्रसिद्ध और शक्तिशाली नेता हैं। अपनी प्रसिद्धि के बल पर साल 2014 में सत्ता में आए केसीआर ने इन 50 महीनों के दौरान तमाम योजनाओं से जनता को खुश करने में लगे हैं। हालांकि राज्य में सब कुछ ठीक नहीं है। केसीआर ने यह महसूस कर लिया है जनता के लिए काम करने और राजनीतिक संकटों से निपटने के बावजूद जनता आखिरी समय में अपना मूड बदल सकती है और वह समय से पहले चुनाव कराकर विपक्ष को चौंकाना चाहते हैं।












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