मिलिए भारत की पहली महिला ट्रक मैकेनिक शान्ति देवी से, मर्दों के क्षेत्र में गाड़ा झंडा

पिछले 20 सालों से कर रही हैं ट्रक की मरम्मत। अपने काम से फेमस हो चुकी हैं शान्ति देवी।

दिल्ली। 55 साल की शान्ति देवी इस बात की मिसाल हैं कि काम का बंटवारा मर्द और औरत के आधार पर नहीं किया जा सकता। अगर जज्बा हो तो महिला कोई भी काम कर सकती है।

दिल्ली के बाहरी इलाके में नेशनल हाइवे 4 पर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर डिपो है जहां ट्रकों की मरम्मत के लिए कई वर्कशॉप हैं। इनमें से एक वर्कशॉप पर आपको शान्ति देवी मुस्तैदी से ट्रकों को ठीक करती दिख जाएंगी।

ऐसा माना जाता है कि शान्ति देवी भारत की पहली महिला ट्रक मैकेनिक हैं।

केंद्रीय मंत्री ने शान्ति देवी के बारे किया ट्वीट

गुरुवार को केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने ट्रक मैकेनिक शान्ति देवी के बारे ट्वीट कर उनकी प्रशंसा की।

हरसिमरत कौर ने लिखा, 'हम सब सुनते रहते हैं कि महिला को कौन-कौन से काम करने चाहिए लेकिन 55 साल की शान्ति देवी ने अपने काम से इन सब बातों को गलत साबित किया है। वह ट्रक मैकेनिक हैं। लैंगिक भेदभाव से मुकाबला करने के लिए हमें शान्ति देवी की तरह अन्य साहसी महिलाओं की जरूरत है।'

पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में एक महिला

पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में एक महिला

ट्रक चलाने और ठीक करने के काम में पुरुषों का वर्चस्व रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में एक महिला के तौर शान्ति देवी ने काम करके अद्भुत साहस और जज्बे का परिचय दिया।

शान्ति देवी का कहना है कि पहले उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे लोग उनके काम की सराहना करने लगे। शान्ति देवी अपने वर्कशॉप पर दिनभर ट्रक ठीक करने के काम में व्यस्त रहती हैं। इस काम में उनके दूसरे पति राम बहादुर सहयोग करते हैं।

शान्ति देवी को ट्रक ठीक करते देखकर लोग अचरज में पड़ जाते हैं। मीडिया में अपने बारे में खबरें पढ़कर शान्ति देवी को खुशी होती है और वह कहती हैं कि इस वजह से उनको पहचान मिली है। उनका कहना है कि महिला चाहे तो कुछ भी कर सकती हैं।

अपनी शादी के लिए शान्ति देवी ने जुटाए पैसे

अपनी शादी के लिए शान्ति देवी ने जुटाए पैसे

मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहनेवाली शान्ति देवी ने अपनी जिंदगी के बारे में बताया कि उनके मां-बाप बेहद गरीब थे। परिवार चलाने के लिए उनकी मां बहुत मेहनत करती थीं। शान्ति देवी ने भी सिलाई और बीड़ी बनाने का काम करना शुरू किया। उन्होंने 4,500 रुपए जमा किए और शादी करके पति के साथ बाहर निकल गई।

शान्ति देवी का पहला पति कोई काम नहीं करता था। इस बारे में उन्होंने बताया कि वह जो भी कमाती थी, उनका पति शराब पीने में उड़ा देता था। परिवार की आर्थिक हालत खराब थी। एक वक्त का चूल्हा जलना मुश्किल था। ऐसे हालात में वह काम की तलाश में परिवार सहित 45 साल पहले दिल्ली आईं। पहले वह इसी डिपो में चाय की दुकान चलाती थीं।

20 साल से ज्यादा समय से कर रही हैं ट्रक की मरम्मत

20 साल से ज्यादा समय से कर रही हैं ट्रक की मरम्मत

ज्यादा शराब पीने की वजह से शान्ति देवी के पहले पति की मौत हो गई। राम बहादुर के साथ उन्होंने दूसरी शादी की। डिपो में शान्ति देवी को चाय की दुकान से कम आमदनी होती थी।

बाद में ज्यादा कमाई करने के लिए उन्होंने ट्रक ठीक करने का काम सीखा। इस काम में पति से उनको भरपूर मदद मिली। वह कहती हैं कि पति के साथ वह टीम की तरह काम करती हैं।

आज शान्ति देवी पति के साथ डिपो में पिछले 20 साल से भी ज्यादा समय से ट्रक ठीक करने का काम कर रही हैं। पति राम बहादुर को शान्ति देवी पर गर्व होता है। वह कहते हैं कि आज पत्नी की कमाई की वजह से उनके पास घर है। बच्चे पढ़-लिख गए और उनकी शादी हो सकी।

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