'कुछ राज्यों से मनरेगा को लेकर फर्जी मांगें आ रही हैं', वित्त मंत्रालय का दावा
राज्यों में केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितता की शिकायतें मिल रही हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर राज्यों से लगातार फर्जी मांगें आ रही हैं। सरकार को मनरेगा योजना में अधिक आवंटन की कोई जल्दी नहीं है। सरकार ने आश्वासन दिया कि मनरेगा में धन की कोई कमी नहीं होगी। यह जानकारी वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने दी है।
यह आश्वासन देते हुए कि मनरेगा के तहत मांगों को पूरा किया जाएगा, वित्त मंत्रालय के शीर्ष सूत्रों ने 6 नवंबर को कुछ राज्यों से प्राप्त फर्जी मांगों का मुद्दा उठाया। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि मनरेगा के तहत मुद्दा धन की कमी नहीं है। मुद्दा अलग है, जिसे उजागर नहीं किया जा रहा है। मनरेगा के तहत अनियमितताएं हैं, जिसके लिए शिकायतें मिली हैं। कुछ राज्य फर्जी मांगें भेज रहे हैं।

दरअसल, 2023-24 में मनरेगा के लिए केंद्रीय बजट आवंटन 60,000 करोड़ रुपये है, जो पिछले साल के 89,400 करोड़ रुपये के परिव्यय से भारी कटौती है। सरकार इस साल 60,000 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन का उपयोग पहले ही कर चुकी है। चूंकि इस फाइनेंशियल इयर में अभी भी चार महीने से अधिक समय बचा है। इसलिए, सरकार अगले संसद सत्र में अनुपूरक मांग में मनरेगा आवंटन बढ़ा सकती है।
सूत्र ने कहा कि जब सरकार मुफ्त खाद्यान्न योजना को 5 साल के लिए बढ़ा सकती है, तो हमारे पास मनरेगा के लिए धन क्यों नहीं होगा? मनरेगा के तहत धन की कोई कमी नहीं होगी। मनरेगा एक मांग आधारित योजना है। इससे पहले अगस्त में, मनीकंट्रोल ने रिपोर्ट दी थी कि वित्त मंत्रालय सरकार द्वारा नियुक्त समिति की सिफारिश के अनुसार, खर्च बढ़ाकर योजना के तहत नौकरियों की योजना को पुनर्जीवित करने के पक्ष में नहीं है और इसके बजाय बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में अधिक धन लगाना पसंद करता है।












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