सात महीनों की नजरबंदी से रिहा होने के बाद क्या बोले फारूक अब्दुल्ला

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और एनसी सांसद फारूक अब्दुल्ला शुक्रवार को रिहा हो गए हैं। 5 अगस्त को हिरासत में लिए गए फारूक की रिहाई का आदेश शुक्रवार सुबह ही जारी किया गया था। रिहाई के बाद फारूक ने कहा कि प्रदेश और देश के वो उन सभी लोगों और नेताओं का वो शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने उनकी रिहाई के लिए आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि अब वो फ्री हैं, अब मैं दिल्ली जा सकता हूं और संसद में आप सबकी आवाज उठा सकता हूं।

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    Farooq Abdullah की Detention खत्म, नजरबंदी खत्म होने के बाद ये बोले फारूक अब्दुल्ला |वनइंडिया हिंदी
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    अब्दुल्ला ने कहा, सिर्फ मेरी रिहाई काफी नहीं है। सभी नेताओं का रिहा किया जाना जरूरी है। मैं उम्मीद करता हूं कि भारत सरकार सभी राजनैतिक बंदियों को रिहा करने के लिए कदम उठाएगी।

    फारूक अब्दुल्ला को 5 अगस्त 2019 की रात को उनके घर पर ही नजरबंद कर लिया गया था। तब से वो नजरबंद थे। जम्मू कश्मीर के गृह विभाग ने शुक्रवार को उनकी नजरबंदी खत्म किए जाने को लेकर आदेश जारी कर दिए हैं। फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून (पीएसए) को रद्द कर दिया है।

    फारूक अब्दुल्ला की पीएसए की मियाद को दो बार बढ़ाया जा चुका था। अगस्त में हिरासत में लिए जाने के बाद सितंबर में उन पर पीएसए लगाया गया। 13 दिसंबर को उनकी हिरासत को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया। ये मियाद 13 मार्च को खत्म होनी थी, जिसे आगे ना बढ़ाने का फैसला जम्मू कश्मीर प्रशासन ने लिया है।

    एनसी सांसद फारूक अब्दुल्ला और कश्मीर के सभी प्रमुख नेताओं को 5 अगस्त को हिरासत में ले लिया गया था। इनमें उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और शाह फैसल भी शामिल है। सभी पर पीएसए लगाया गया है। अब फारूक अब्दुल्ला की हिरासत को खत्म करने के आदेश जारी किए गए हैं। बाकी नेता अभी भी कैद में हैं।

    केंद्र सरकार ने बीते साल 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस खत्म करते हुए दो केंद्रशासित राज्यों में बांटने का फैसला किया था। इस बाबत संसद में बिल लाने से पहले ही कश्मीर के मुख्यधाराओं के ज्यादातर सभी नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। इसमें तीन पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के अलावा कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और सांसद शामिल हैं। उनमें से कुछ नेताओं की रिहाई हो गई है। ज्यादातर बड़े नेता अभी भी हिरासत में हैं। इसके अलावा संचार साधने पर भी पाबंदियां लगाई गई थीं। जो बाद में कुछ कम की गईं हैं, कई तरह की पाबंदियां अभी तक जारी हैं।

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