किसान नेताओं को सरकार ने भेजा प्रस्ताव, थोड़ी देर में किसानों की बैठक
नई दिल्ली। सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के प्रदर्शन को दो हफ्ते होने वाले हैं। इस गतिरोध की बीच बुधवार को सरकार की ओर से किसानों के लिए एक प्रस्ताव भेजा गया है। सिंधु बॉर्डर पर मौजूद किसान नेताओं को सरकार की तरफ से मसौदा मिला। इस मसौदे में क्या क्या है अभी यह पता नहीं चला है। किसान अब इस पर विचार कर अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।
Recommended Video

सरकार की ओर से प्रस्ताव मिलने के बाद 40 किसान संगठनों की बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में केंद्र सरकार के लिखित प्रस्ताव पर होगी चर्चा। केंद्र सरकार ने अपने मसौदे में किसानों को भरोसा दिलाया है कि वह MSP पर लिखित प्रस्ताव देगी। किसानों की बिजली भुगतान की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा। केंद्र सरकार ने साथ ही प्रस्ताव में यह भी आश्वासन दिया है कि कृषि कानून के जिस भी मुद्दे पर किसानों को आपत्ति है उसपर सरकार खुले मन से बात करने को तैयार है।
20 पेज के इस प्रस्ताव में किसानों की शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की गई है। । मंडी व्यवस्था पर भी केंद्र सरकार ने किसानों को प्रस्ताव भेजा है। किसान भूमि की कुर्की के संबंध में कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया और इसपर विचार करने की बात कही गई है। किसानों की भूमी पर बड़े उद्योगपतियों के कब्जे की आशंका पर सरकार ने कहा कि इसपर प्रावधान पहले से ही स्पष्ट है। प्रस्ताव में कहा गया है कि किसान की भूमि पर बनाई जाने वाली संरचना पर खरीदार द्वारा किसी प्रकार का कर्ज नहीं लिया जा सकेगा और न ही ऐसी संरचना वह बंधक रख पाएगा।
किसान संघर्ष कमेटी के सदस्य कमलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा कि, सभी तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए। यह हमारी मांग है। यदि प्रस्ताव केवल संशोधनों की बात करता है तो हम इसे अस्वीकार कर देंगे।
किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि 'हम मीटिंग में अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं और केंद्र के प्रस्ताव पर फैसला लेंगे। किसान वापस नहीं जाएंगे। ये उनके सम्मान का विषय है। क्या सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेगी? क्या निरंकुशता दिखाई जाएगी? अगर सरकार जिद्दी है तो किसान भी जिद्दी हैं? उन्हेें कानूनों को वापस लेना ही होगा।












Click it and Unblock the Notifications