विज्ञान भवन में सरकार से मुलाकात करने गए किसानों ने सरकारी खाना खाने से किया इनकार,खुद की लाई रोटियां खाई

नई दिल्ली। पंजाब, हरियाणा समेत देश के अलग-अलग हिस्सों के किसान केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित हैं और सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों की मांगों पर विचार करने और गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से पहल की गई और किसानों को बातचीत के लिए दिल्ली के विज्ञान भवन बुलाया गया। लेकिन किसानो और सरकार के बीच सुलह का रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है। किसान भी अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। किसानों के प्रतिनिधियों ने आज विज्ञान भवन में सरकारी खाने से परहेज करके अपने तेवर साफ कर दिया।

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    दरअसल किसानों को मुलाकात के लिए उनके प्रतिनिधियों को सरकार ने दिल्ली के विज्ञान भवन बुलाया था, जहां किसानों के प्रतिनिधियों के लिए खाना, चाय आदि का इंतजाम किया गया था, लेकिन किसानों के प्रतिनिधियों ने सरकार की ओर से आयोजित इस भोज को लेने से इनकार कर दिया। ये किसान प्रतिनिधि अपने साथ खाना पैक करके लाए थे और इन लोगों ने विज्ञान भवन में अपना पैक कराकर लाया खाना ही खाया। किसान प्रतिनिधियों ने अपने इस कदम से साफ कर दिया है कि जबतक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं वह झुकने के मूड में नहीं हैं।

    बता दें कि किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण सम्मान लौटा दिया है। प्रकाश सिंह बादल ने राष्ट्रपति को तीन पेज का पत्र लिखकर कृषि कानूनों के विरोध में अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस कर दिया है। जिस तरह से किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसकी निंदा करते हुए बादल ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। बादल ने पत्र में लिखा कि मैं इतना गरीब हूं कि किसानों के लिए कुर्बान करने के लिए अब मेरे पास कुछ नहीं बचा है, आज मैं जो भी हूं वह किसानों की वजह से हूं, ऐसे में जब किसानों का अपमान किया जा रहा है तो इस सम्मान को अपने पास रखने का कोई मतलब नहीं है।

    प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि जिस तरह से किसानों के साथ धोखा किया गया है उससे मुझे काफी दुख पहुंचा है। किसानों के आंदोलन को गलत तरह से पेश किया जा रहा है और यह बहुत ही दर्दनाक है। बता दें कि इससे पहले पहले भी बादल परिवार कृषि कानूनों का विरोध कर चुका है। इन कानुनों के विरोध में हरसिमरत कौर ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और इन कानूनों को किसानों के साथ धोखा करार दिया था। यही नहीं सुखबीर सिंह बादल ने अकाली दल को एनडीए से अलग करने का भी ऐलन कर दिया था और कहा था कि अगला चुनाव अकाली दल अकेले लड़ेगी।

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